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लोकसभा में राहुल गांधी के अग्निवीर योजना पर दिए बयान पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कड़ी आपत्ति जताई

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राहुल गांधी पर गलत बयान देकर लोकसभा को गुमराह करने का आरोप लगाया।

सोमवार को लोकसभा में नेपा प्रतिपक्ष राहल गांधी ने अग्निपथ स्कीम को लेकर जमकर सरकार को घेरा। राहुल गांधी ने अग्निवीर योजना को लेकर जमकर सवाल उठाए। राहुल गांधी ने संसद में कहा कि अग्निवीरों को मोदी सरकार शहीद का दर्जा नहीं देती है। उन्हें मुआवजा नहीं दिया जाता। कांग्रेस आएगी तो अग्निवीर हटाएगी। अग्निवीर सेना की नहीं बल्कि पीएमओ की स्कीम है। इनके लिए अग्निवीर यूज एंड थ्रो मजदूर हैं। वहीं राहुल गांधी संसद में जब यह बोल रहे थे, तो रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह खड़े हुए उनके बयानों पर आपत्ति जताई और कहा कि नेता विपक्ष सदन में गलतबयानी कर रहे हैं।

राहुल गांधी ने अग्निवीर मुद्दे पर सरकार को घेरा
सोमवार को जब नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अग्निवीर मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कहा कि अग्निवीर को ‘जवान’ नहीं कहा जाता। साथ ही उन्होंने कहा कि चार साल तक सेवा करने वाले अग्निवीरों को पेंशन भी नहीं मिलेगी। राहुल गांधी ने कहा, “एक अग्निवीर जवान ने बारूदी सुरंग विस्फोट में अपनी जान गंवा दी, लेकिन हिंदुस्तान की सरकार उसे शहीद नहीं कहती। उसे शहीद का दर्जा नहीं मिलेगा। आम जवान को पेंशन मिलेगी। अग्निवीर इस्तेमाल करो और फेंक दो वाला मजदूर है।” राहुल गांधी ने आगे कहा कि एक और आप उन्हें 6 महीने की ट्रेनिंग देते हैं और दूसरी तरफ चीनी सैनिकों को पांच साल की ट्रेनिंग मिलती है। आप हमारे जवान को राइफल देकर उसे उनके सामने खड़ा कर देते हैं। आप उनके दिल में डर पैदा करते हैं। आप दो जवानों के बीच दरार पैदा करते हैं। एक को पेंशन मिलती है और दूसरे को नहीं और फिर आप खुद को ‘देशभक्त’ कहते हैं। ‘ये कैसे देशभक्त हैं?”

‘शहीद’ शब्द का इस्तेमाल किया
वहीं, लोकसभा में राहुल गांधी के अग्निवीर योजना पर दिए बयान पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कड़ी आपत्ति जताई। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राहुल गांधी पर गलत बयान देकर लोकसभा को गुमराह करने का आरोप लगाया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, “राहुल गांधी को गलत बयान देकर सदन को गुमराह करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। उन्होंने आगे कहा, “युद्ध के दौरान या देश की सुरक्षा के दौरान अगर हमारा कोई अग्निवीर का जवान शहीद होता है, तो उसे केंद्र सरकार द्वारा एक करोड़ रुपये की धनराशि उसके परिवार की सहायता के रूप में दी जाती है।” राहुल गांधी अग्निवीरों पर गलत बयान न दें, वे सदन को गुमराह करने का काम कर रहे हैं।

अग्निवीर को शहीद का दर्जा नहीं
हालांकि केंद्रीय रक्षामंत्री ने राहुल गांधी के आरोपों का जवाब देने के दौरान ‘शहीद’ शब्द का इस्तेमाल किया। उन्होंने अपने जवाब में कहीं भी यह नहीं कहा कि शहीद होने के बाद अग्निवीर को शहीद का दर्जा नहीं दिया जाता। ऐसा पहली बार हुआ जब सदन में आधिकारिक तौर पर अग्निवीरों के लिए ‘शहीद’ शब्द का इस्तेमाल किया गया है। रक्षा मंत्री के इस बयान के सैन्य हलकों में माना जाने लगा है कि सरकार देर-सबेर युद्ध के दौरान या देश की सुरक्षा के दौरान जान गंवाने वाले अग्निवीरों को शहीद का दर्जा दे सकती है। हालांकि इस बात की पुष्टि सैन्य सूत्रों ने नहीं की है।

पूर्व डीजीएमओ ने कही ये बड़ी बात
2016 में हुई सर्जिकल स्ट्राइक की योजना बनाने में शामिल, आतंकवाद रोधी अभियानों में व्यापक अनुभव रखने वाले और जम्मू-कश्मीर के पीरपंजाल इलाके में तैनात 16 कोर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग (जीओसी) और सैन्य अभियान महानिदेशक (डीजीएमओ) रह चुके लेफ्टिनेंट जनरल परमजीत सिंह सांगा ने अमर उजाला को खास बातचीत में बताया कि देश की रक्षा करते हुए, किल्ड इन एक्शन या ऑपरेशनल कैजुअल्टी में किसी भी जवान की मृत्यु होती है, तो उसे ‘शहीद’ ही कहा जाता है। रक्षा मंत्री ने उसी संदर्भ में ‘शहीद’ शब्द का इस्तेमाल किया होगा। लेफ्टिनेंट जनरल परमजीत सिंह सांगा के मुताबिक उनका निजी मत है कि अग्निवीर योजना में कुछ तो फेरबदल होना चाहिए। चाहे तो सरकार नियमित अग्निवीरों की परसेंटज बढ़ा सकती है।

25 फीसदी अग्निवीरों को ही नियमित करने की शर्त अग्निपथ योजना में रखी गई थी। वहीं उनका ट्रेनिंग पीरियड बढ़ाया जा सकता है। एक फौजी के लिए छह माह का ट्रेनिंग पीरियड अपर्याप्त है, इसे बढ़ाया जाना चाहिए। वहीं जब उनका ट्रेनिंग टाइम बढ़ेगा तो, उनका एंगेजमेंट टाइम भी बढ़ाना होगा। वह आगे कहते हैं कि जब अग्निवीरों की ट्रेनिंग पर सरकार ने समय लगाया है, रिसोर्सेज लगाएं हैं, तो उसे बेकार न जाने दें। केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में सरकार उनकी भर्ती बढ़ा सकती है, और उनकी ट्रेनिंग का सदुपयोग कर सकती है।

लेफ्टिनेंट जनरल परमजीत सिंह सांगा के मुताबिक हमारे देश में नौकरी युवा की जरूरत है। वह आर्मी को सुरक्षित जॉब के तौर पर देखता है। लेकिन अग्निवीर योजना के आने से उनमें नाराजगी है। युवा नौकरी में कंटीन्यूटी चाहता है। वे नौकरी में स्थिरता और सुरक्षा चाहते हैं। जब उन्हें यह मिलेगा, तो उनका असंतोष खत्म हो जाएगा।

आंतरिक सर्वे करा रही सरकार
रक्षा मंत्रालय के तहत आने वाले डिपार्टमेंट ऑफ मिलिट्री अफेयर्स (डीएमए) ने आर्मी, नेवी और एयरफोर्स से अग्निवीरों पर एक आंतरिक सर्वे करा रही है, जिसमें अग्निवीरों से जुड़े सवाल पूछे जा रहे हैं। इसका मकसद भर्ती प्रक्रिया पर योजना के असर को जानना है। सरकार की तरफ से संकेत दिए गए कि इस योजना के परमानेंट किए जाने वाले अग्निवीरों की संख्या को 25 से बढ़ा कर 50 फीसदी किया जा सकता है।

सरकार ने दी एक करोड़ रुपये से ज्यादा की आर्थिक मदद
सियाचिन में तैनात अग्निवीर जवान अक्षय लक्ष्मण गावते की ड्यूटी के दौरान मौत हो गई थी। लक्ष्मण गावते पहले अग्निवीर थे, जिनका ड्यूटी के दौरान निधन मौत हुआ था। वहीं एक आरटीआई से खुलासा हुआ था कि अक्षय लक्ष्मण गावते के परिजनों को सरकार ने एक करोड़ रुपये से ज्यादा की आर्थिक मदद प्रदान की है। लक्ष्मण भारतीय सेना की फायर एंड फ्यूरी कोर (14 कोर) का हिस्सा थे, जो लद्दाख में तैनात है। अग्निपथ योजना को लागू करने के दौरान सरकार ने कहा था कि ड्यूटी के दौरान अगर किसी अग्निवीर का निधन हो जाता है, तो उन्हें बीमा की रकम मिलेगी।

इन हालात में नहीं मिलेगा गार्ड ऑफ ऑनर 
वहीं सेना का स्पष्ट कहना है कि अगर कोई अग्निवीर सुसाइड कर लेता है, तो गार्ड ऑफ ऑनर नहीं दिया जाएगा। सेना के नियमों के मुताबिक, अग्निवीरों को हर महीने 30 हजार से 40 हजार सैलरी मिलेगी। अग्निवीरों को जॉइनिंग के पहले साल में 4.76 लाख रुपये का पैकेज मिलता है। वहीं, चार साल का कार्यकाल पूरा होने तक इसमें 6.92 लाख रुपये तक बढ़ोतरी की जा सकती है। साथ ही, तीनों सेनाओं में तैनात अग्निवीरों को स्थायी सैनिकों की तरह अवॉर्ड, मेडल और भत्ता दिया जाएगा। साथ ही, सरकार 44 लाख रुपये का बीमा भी कराएगी।

अग्निवीर के शहीद होने पर क्या है मुआवजा?
इसी साल रक्षा मामलों की संसदीय स्थायी समिति ने अपनी एक रिपोर्ट में रक्षा मंत्रालय से सिफारिश की थी कि ड्यूटी के दौरान शहीद होने वाले अग्निवीरों के परिवारों को भी वही लाभ मिलना चाहिए, जो नियमित सैनिक के शहीद होने पर उनके परिवारों को मिलते हैं। रक्षा मंत्रालय ने समिति को सैनिकों को मिलने वाले मुआवजे के बारे में जानकारी दी। जिसके जवाब में स्थायी समिति ने रक्षा मंत्रालय से कहा कि ‘सरकार सभी हालात में सैनिकों के शहीद होने पर मुआवजे की राशि 10 लाख रुपये तक बढ़ाने पर विचार करे। किसी भी श्रेणी के तहत न्यूनतम मुआवजा राशि 35 लाख रुपये और अधिकतम मुआवजा राशि 55 लाख रुपये होनी चाहिए।’

अग्निवीरों को पहले साल 30 हजार रुपये, दूसरे साल 33 हजार, तीसरे साल 36 हजार 500 और आखिरी साल में 40 हजार रुपये प्रति महीना सेलरी मिलती है। वहीं 30 फीसदी हिस्सा कॉर्पस फंड में जमा करना पड़ता है और सरकार भी इतनी ही राशि का योगदान इस फंड में देती है। साथ ही, तीनों सेनाओं में तैनात अग्निवीरों को स्थायी सैनिकों की तरह अवॉर्ड, मेडल और भत्ता दिया जाएगा। साथ ही, सरकार 44 लाख रुपये का बीमा भी कराएगी।

वहीं अगर कोई अग्निवीर ड्यूटी के दौरान शहीद होता है, तो उसे 48 लाख रुपये का इंश्योरेंस कवर, 44 लाख रुपये अनुग्रह राशि, चार सालों की सेवा निधि और कॉर्पस फंड मिलता है। मृतक अक्षय लक्ष्मण गावते के परिवारजनों को कुल मिला कर एक करोड़ 30 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी गई है। इनमें 48 लाख रुपये गैर-अंशदायी बीमा (इंश्योरेंस कवर), 44 लाख रुपये की अनुग्रह राशि (एकमुश्त एक्स-ग्रेशिया), आर्मी वाइव्स वेलफेयर एसोसिएशन से 30,000 रुपये, आर्मी सेंट्रल वेलफेयर फंड से 8 लाख रुपये, सेवा निधि में अग्निवीर द्वारा दिए गए 30 फीसदी योगदान, जिसमें सरकार का भी बराबर योगदान होता है और पूरी राशि पर ब्याज दिया गया है। इसके अलावा परिजनों को मृत्यु की तारीख से चार साल पूरे होने तक शेष कार्यकाल के लिए  वेतन भी दिया जाता है।

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