चार साल साथ रहे एसोसिएट MLA भागे ना, कांग्रेस ने बिठाया मंत्री का पहरा

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शिमला. एसोसिएट विधायक के भाजपा में शामिल होने से कांग्रेस में हड़कंप मच गया है। इस फैसले के बाद कांग्रेस ने अन्य एसोसिएट विधायकों से भी संपर्क साधना शुरू कर दिया है। इनसे बात करने के लिए बकायदा एक मंत्री की ड्यूटी भी लगाई गई है। चौपाल के निर्दलीय विधायक ने शुक्रवार को भाजपा का दामन थामने का फैसला लिया है। वह 26 मार्च को निर्वाचन हलके में रैली कर भाजपा का दामन थामेंगे। इस एक्शन का रिएक्शन भी सरकार और कांग्रेस में देखने को मिला है।
एक एसोसिएट विधायक के छिटकने के बाद सरकार पूरी तरह से हरकत में आ गई है। सूत्र बताते हैं कि मुख्यमंत्री कार्यालय से कांग्रेस के अन्य एसोसिएट विधायकों को फोन के माध्यम से संपर्क किया गया। इसके बाद मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से इन एसोसिएट विधायकों की बात हो सके, इसके लिए सभी को निर्देश दिए थे।
सूत्र बताते हैं कि सीएम से तो इन विधायकों की बात नहीं हो सकी। इतना ही नहीं इसके बाद युवा कांग्रेस के अध्यक्ष के साथ दो एसोसिएट विधायकों के बीच बातचीत हुई। चौपाल के निर्दलीय विधायक बलबीर वर्मा विधानसभा सदन में बेहतर कार्यवाही चलती रहे, इसके लिए जब भी अध्यक्ष की आेर से सर्वदलीय बैठक बुलाई जाती थी। बलवीर वर्मा निर्दलीय विधायकों का प्रतिनिधित्व करते थे।
मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि चौपाल विस क्षेत्र से निर्दलीय विधायक बलवीर वर्मा के भाजपा में शामिल होने से सरकार को कोई फर्क नहीं पड़ता। मुख्यमंत्री ने कहा कि वे किसी को जाने से नहीं रोक सकते। होटल होलीडे होम में हिम ऊर्जा की ओर से आयोजित कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि विधायक बलवीर वर्मा यदि भाजपा में जाना चाहते हैं तो जा सकते हैं। धर्मशाला को दूसरी राजधानी बनाने के विरोध में वे भाजपा का दामन थाम रहे हैं, के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसा कतई नहीं है। दूसरी राजधानी का दुष्प्रचार कुछ स्वार्थी लोग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि शिमला से न तो कोई कार्यालय शिफ्ट किया जाएगा और न ही कर्मचारी। मुख्यमंत्री ने कहा कि धर्मशाला में नए कार्यालय सरकार खोलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिमला आज भी राजधानी है और कल भी रहेगी।
कांगड़ा में दो एसोसिएट विधायक
इस पूरी एपिसोड के बाद कांगड़ा के ही वरिष्ठ मंत्री को सरकार ने यह जिम्मा सौंपा है। कांगड़ा के दो एसोसिएट विधायक हैं। इन दोनों में से कोई किसी तरह से फिलहाल सरकार या पार्टी का साथ न छोड़े, इसके लिए मंत्री को जिम्मा सौंपा है। हिमाचल में एसोसिएट विधायकों की संख्या फिलहाल चार है। इन चारों ने विधानसभा में ही मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के साथ होने की बात को लेकर प्रेसवार्ता की थी। इसके बाद भाजपा ने ही इन चारों सदस्यों की सदस्यता को लेकर अध्यक्ष के पास केस भी दायर कर रखा है। अब उम्मीद है कि इस केस को भी भाजपा वापस ले सकती है।
नंबर गेम में सरकार को खतरा नहीं
राज्य में नंबर गेम फिलहाल सरकार को सभी एसोसिएट सदस्यों के जाने से भी कोई फर्क नहीं पड़ेगा। वर्तमान में हिमाचल में 68 सदस्यों में से 67 है। इसमें से भाजपा के 27 सदस्य है। कांग्रेस के सदस्यों की संख्या हिमाचल में 36 हैं। सरकार बनाने या स्थाई सरकार के लिए यह हिमाचल के जादुई आंकड़े से एक सीट ज्यादा है, इसलिए सरकार को फिलहाल कोई फर्क नहीं पड़ता है, लेकिन चार साल तक सरकार से साथ रहने वाले विधायकों के छिटकने से कहीं बाद में नुकसान न हो, इस आशंका को खत्म करने के लिए सरकार की ओर से काम किया जा रहा है।

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