बिजली बोर्ड के 22 हजार कर्मचारियों ने दी आंदोलन की चेतावनी, जानिए क्यों

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शिमला: हिमाचल सरकार पर नौकरशाही लगातार हावी हो रही है। हालत यह है कि बिजली बोर्ड जैसे सार्वजनिक क्षेत्र के बड़े उपक्रम में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के आदेश ठेंगे पर हैं। बिजली बोर्ड प्रबंधन संशोधित ग्रेड-पे से उपजी विसंगतियों को दूर करने में नाकाम रहा है। सीएम के आदेशों के बावजूद 48 कैटेगरी की वेतन विसंगतियां जस की तस हैं। उलटे कर्मचारियों से रिकवरी हो गई है। इससे बोर्ड के कर्मचारियों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। उन्हें अब सरकार के मुखिया के आदेश की अनुपालना करवाने के लिए भी आंदोलन छेडऩा पड़ रहा है। इस सिलसिले में बोर्ड की सबसे बड़ी इम्प्लाइज यूनियन ने प्रबंधन को एक महीने का नोटिस थमाया है। अगर इस दौरान वेतन विसंगतियों और रिकवरी का मुद्दा न सुलझा तो फिर वे बड़ा आंदोलन छेड़ेंगे। 

यूनियन ने बिजली बोर्ड के वित्तीय प्रबंधन पर भी सवाल उठाए हैं। आंदोलन की स्थिति में हिमाचल में बिजली व्यवस्था चरमराने का खतरा पैदा होगा। कर्मचारियों को इस बात का मलाल है कि उन्हें टाइम स्केल या फिर संशोधित ग्रेड-पे नहीं मिल रही है। इससे हरेक कर्मचारी को प्रतिमाह 300 से लेकर 3000 रुपए का नुक्सान उठाना पड़ रहा है। प्रभावित कर्मचारियों की कुल 48 कैटेगरी हैं। इनके 2 हजार कर्मचारियों को ये वित्तीय लाभ नहीं मिल रहे हैं। इनके पक्ष में इम्प्लाइज यूनियन मजबूती के साथ खड़ी हो गई है। यूनियन ने चेतावनी दी है कि अगर मामले को जल्द न सुलझाया तो वे पूरे प्रदेश में आंदोलन छेड़ देंगे। तब जो भी हालात निर्मित होंगे, उसकी जिम्मेदारी बोर्ड प्रबंधन की रहेगी। 
हिमाचल प्रदेश राज्य बिजली बोर्ड इम्प्लाइज यूनियन के अध्यक्ष कुलदीप खरवाड़ा व महासचिव हीरा लाल वर्मा ने बताया कि बोर्ड प्रबंधन को एक महीने का नोटिस दिया गया है। उनका कहना है कि वेतन विसंगतियों का मुद्दा पिछले कई वर्षों से लगातार उठाया जा रहा है लेकिन ये विसंगतियां अभी तक दूर नहीं हो सकी हैं जबकि नए वेतन आयोग की सिफारिशें भी लागू होने जा रही हैं। इन विसंगतियों के चलते कर्मचारियों की पे रैगुलेट करने के साथ-साथ पैंशन में कई अन्य विसंगतियां खड़ी हो गई हैं। इसके चलते कर्मचारियों और पैंशनर्ज को वित्तीय नुक्सान उठाना पड़ रहा है। बिजली बोर्ड के कर्मचारियों का सालाना समारोह में वीरभद्र सिंह ने वेतन विसंगतियां दूर करने के आदेश दिए थे पर अभी तक मामला अधर में लटका हुआ है और कई कर्मचारियों के वेतन से रिकवरी हो रही है।
राज्य बिजली बोर्ड में करीब 22 हजार कर्मचारी कार्यरत हैं। इनमें से इम्प्लाइज यूनियन के साथ ही करीब 17 हजार कर्मचारी हैं। शेष तकनीकी कर्मचारी हैं। ऐसे में अगर वे आंदोलन पर उतरे तो सूबे की बिजली व्यवस्था चरमरा सकती है। हालांकि अभी उन्होंने एक महीने का ही नोटिस दिया है। बिजली बोर्ड इम्प्लाइज यूनियन की जल्द ही शिमला में बैठक होगी। इसमें अगली रणनीति तय होगी। बैठक में कर्मचारियों के ज्वलंत मुद्दों पर गहन चर्चा होगी। इसमें प्रदेशभर के प्रमुख पदाधिकारी भाग लेंगे। अगर तब तक बोर्ड प्रबंधन ने कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया तो फिर इसी बैठक में राज्य व्यापी आंदोलन की पुख्ता रणनीति भी तैयार होगी।

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