केंद्र सरकार के मंसूबों पर पानी फेरेगी कम वोल्टेज!

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शिमला: केंद्र सरकार के रूफ टॉप सोलर प्रोग्राम को शुरूआती चरण में ‘झटका’ लग सकता है। इस प्रोग्राम की राह में लो वोल्टेज की समस्या सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभर रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में वोल्टेज की समस्या आम रहती है, लिहाजा अभी से बिजली बोर्ड के अधिकारियों के माथे पर बल पडऩे आरंभ हो गए हैं। इसमें लाभार्थी को सबसे पहले बोर्ड की ही कन्सैंट लेनी होगी और टैस्ट रिपोर्ट के आधार पर ही घरों की छतों पर सोलर प्लांट के माध्यम से बिजली पैदा हो सकेगी। इसका फार्मूला भी ढूंढ लिया गया है। लोडिंग कैपेसिटी जितनी होगी, उसकी 30 प्रतिशत ही बिजली उत्पादित हो पाएगी। मिसाल के तौर पर अगर किसी घर की छत का कुल एरिया 100 स्क्वेयर मीटर है तो वहां पर 10 किलोवाट बिजली पैदा हो सकेगी लेकिन लाभार्थी को 3 किलोवाट बिजली पैदा करने की ही इजाजत मिल सकेगी।
बोर्ड 5 रुपए 83 पैसे प्रति यूनिट में खरीदेगा बिजली
लाभार्थी बिजली को बिजली बोर्ड के जरिए प्रति यूनिट 5 रुपए 83 पैसे में बेचेगा और अपने इस्तेमाल के लिए वह बोर्ड से वापस बिजली खरीदेगा जो उसे सस्ती मिलेगी लेकिन यदि बिजली गुल होगी तो उस सूरत में छतों पर सोलर प्लांट की बिजली की भी बोर्ड को सप्लाई नहीं हो पाएगी। यह योजना बैटरीयुक्त नहीं ग्रिड कनैक्टिड वाली है। इसमें बैटरी का प्रावधान नहीं है। इसके लिए लाभार्थी को अलग से इन्वर्टर खरीदना होगा, जिसमें सबसिडी का प्रावधान नहीं होगा। 
लग से लगेंगे मीटर, नहीं बिछानी होगी ट्रांसमिशन लाइन 
हिम ऊर्जा के सी.ई.ओ. कंवर भानू प्रताप सिंह ने बताया कि रूफ टॉप सोलर प्रोग्राम पर केंद्र 70 प्रतिशत सबसिडी देगा। पहली किस्त आ चुकी है और अभी तक करीब 20 लाभार्थियों के प्रस्ताव हमें प्राप्त हुए हैं। राज्य में लोगों को जागरूक करने के लिए 4 कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी। यह बात अलग है कि लोडिंग कैपेसिटी जितनी होगी, उसकी 30 प्रतिशत क्षमता पर ही बिजली पैदा हो सकेगी। इसके लिए अलग से मीटर लगेंगे पर ट्रांसमिशन लाइन नहीं बिछानी होगी। 

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