कुल्लू में एडमिशन की दौड़ में एक बार फिर निजी स्कूल आगे

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कुल्लू : प्रदेश सरकार ने भले ही जिला कुल्लू के गांव-गांव, शहर-शहर में विभिन्न स्थानों पर स्कूल खोल दिए हों तथा प्रत्येक बच्चे को शिक्षित करने के लिए अनेक योजनाएं शुरू कर दी हों लेकिन फिर भी कुल्लू में निजी स्कूलों ने सरकारी स्कूलों को एडमिशन की दौड़ में पीछे छोड़ दिया है। पहली से लेकर 5वीं कक्षा तक के सरकारी स्कूलों के मुकाबले निजी स्कूलों में बच्चों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। सर्वशिक्षा अभियान द्वारा किए गए असर सर्वेक्षण के तुलनात्मक अध्ययन ने भी इस बात को स्पष्ट कर दिया है कि अभिभावकों का मोह निजी स्कूलों से भंग नहीं हो पा रहा है तथा निजी स्कूलों में बच्चों के दाखिले का आंकड़ा वर्ष दर वर्ष बढ़ता ही जा रहा है जो अब तक बढ़कर 33.5 प्रतिशत पहुंच चुका है। सरकार द्वारा इतनी सुविधाएं मुहैया करवाने के बाद भी 5वीं कक्षा तक के बच्चों का निजी स्कूलों की तरफ हो रहा पलायन ङ्क्षचता का विषय बना हुआ है। वर्तमान समय में उच्च वर्ग से लेकर मध्य वर्ग के लोग शिक्षा के महत्व के प्रति जागरूक हो चुके हैं तथा अपने बच्चों को प्रारंभ से ही अच्छी शिक्षा देने के लिए अत्यधिक खर्च उठाने से भी परहेज नहीं कर रहे हैं, ऐसे में सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता पर प्रश्नचिन्ह लग रहे हैं जबकि वर्ष 2014 से 2016 तक बच्चों में सीखने-पढ़ने व जमा-घटाने की गुणवत्ता में 10 प्रतिशत भी वृद्धि नहीं हो पाई है।

असर सर्वेक्षण की रिपोर्ट
सर्वशिक्षा अभियान द्वारा प्रदेशभर में किए गए असर सर्वेक्षण के तहत जिला कुल्लू में तीसरी से 5वीं कक्षा तक के बच्चों में पढऩे की क्षमता वर्ष 2014 में 80.6 प्रतिशत थी जबकि वर्ष 2016 में यह आंकड़ा बढ़कर मात्र 86.5 प्रतिशत ही हो पाया है, वहीं जमा-घटाव करने में वर्ष 2014 में 66.5 प्रतिशत बच्चे सक्षम पाए गए थे जो वर्ष 2016 में बढ़कर 74.6 प्रतिशत ही हो पाया है, वहीं 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों की निजी स्कूलों में दाखिले की संख्या वर्ष 2012 में 25.4 प्रतिशत, व वर्ष 2014 में 31.7 प्रतिशत थी जो अब बढ़कर 33.5 प्रतिशत हो चुकी है।
 

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