सीएम दिल्ली से निकल गए हैं; 9:30 बजे मलिक को मिले मैसेज के बाद बिगड़ती चली गई बात

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पानीपत.लगभग तय माना जा रहा था कि शुक्रवार दोपहर में 2 बजे दिल्ली में संयुक्त प्रेसवार्ता में मंत्रियों की कमेटी और यशपाल गुट की आरक्षण संघर्ष समिति सुलह की घोषणा कर देंगी। दोपहर होते-होते मामला उलझ गया। बताते हैं कि सुबह 9.30 बजे यशपाल मलिक को किसी से मिले मैसेज के बाद हालात बदले। यह संदेश था कि सीएम मनोहरलाल दिल्ली से निकल चुके हैं, चंडीगढ़ जाएंगे। गुरुवार को मंत्रियों की कमेटी से वार्ता के बाद पानीपत में मलिक मीडिया को कह चुके थे कि दिल्ली में पहले सीएम से बात होगी।
सीएम के दिल्ली से निकलने की सूचना मिलते ही मलिक ने नांगलोई में संघर्ष समिति की कोर कमेटी की बैठक बुलाई। इसमें कहा कि सीएम बैठक में नहीं आएंगे तो समझौता भी नहीं होगा। सरकार वादे से पलट रही है। अब 20 को दिल्ली कूच करेंगे।
इधर, सरकार और प्रशासन अलर्ट
हांसी : अर्धसैनिक बलों की 2 और कंपनियां बुला ली। कंपनियां सशस्त्र सीमा बल की हैं।
पानीपत : प्रशासन ने अफसरों-कर्मियों की छुट्टी रद्द कर दी है। शनिवार सुबह 8 बजे अफसरों और कर्मियों की लघु सचिवालय में बैठक बुलाई गई है।
एक-दूसरे पर नजर लेकिन संपर्क नहीं
सरकार की तरफ से बातचीत का नेतृत्व कर रहे शिक्षामंत्री रामबिलास शर्मा सुबह से ही दिल्ली में थे। जैसे ही पता चला कि मलिक गुट सीएम की गैरमौजूदगी में संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में आने को तैयार नहीं, उसके कुछ देर बाद शर्मा दिल्ली के भाजपा मुख्यालय में हरियाणा प्रभारी अनिल जैन और भाजपा महामंत्री सुरेश भट्ट से मिले। करीब एक घंटे तक बैठक हुई। जिसमें तय हुआ कि रामबिलास शर्मा दोपहर 2 बजे हरियाणा भवन से प्रेसवार्ता करके समझौते का ऐलान करेंगे। बाद में सीएम ने 4:30 बजे चंडीगढ़ में प्रेसवार्ता की। दिन भर सरकार और यशपाल गुट की एक-दूसरे की गतिविधि पर नजर तो रही लेकिन गतिरोध तोड़ने के लिए किसी भी तरफ से प्रयास नहीं हुआ।
कम्युनिकेशन गैप: सीएम को आना था या नहीं
गुरुवार को पानीपत में मंत्रियों से बातचीत के बाद यशपाल मलिक ने मीडिया से कहा था कि शुक्रवार को दिल्ली में सीएम के साथ बात होगी। मलिक का दावा है कि रामबिलास शर्मा के साथ हुई बातचीत में यह तय हुआ था। जबकि चंडीगढ़ प्रेसवार्ता में सीएम ने कहा कि उनके पास ऐसी कोई सूचना नहीं थी कि उनके साथ बात होनी है।
पार्टी कोर ग्रुप: सभी मांगें मानने का था विरोध
गुरुवार देर शाम दिल्ली में भाजपा के राष्ट्रीय सह महामंत्री वी सतीश के साथ हुई पार्टी कोर ग्रुप की बैठक में आंदोलनकारियों की सभी मांगें मानने का विरोध हुआ था। इसकी पुष्टि कुरुक्षेत्र सांसद राजकुमार सैनी भी कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह बात उठी थी कि बार-बार यशपाल गुट से बात करने से सरकार की कमजोरी झलकती है। सैनी ने कहा कि मलिक सीएम को मिलने के लिए बाध्य नहीं कर सकते।
कानूनी दबाव: हाईकोर्ट ने की थी सख्त टिप्पणी
गुरुवार को ही पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने टिप्पणी की थी कि हिंसा में दर्ज मामलों पर राज्य सरकार आंदोलनकारियों की अप्रत्यक्ष मदद कर रही है। यदि सरकार मुकदमे वापस लेती है तो इसका असर सीधी दिखाई देगा। दंगा करने वालों के साथ सरकार की कोई सहानुभूति नहीं होनी चाहिए। केसों में अनट्रेस रिपोर्ट चिंता का विषय है।

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