इस वजह से फिरा जाट और सरकार के बीच सुलह की उम्मीदों पर पानी

जाटों और हरियाणा सरकार के बीच बात फिर से बिगड़ गई। इस बार दोनों के बीच सुलह की उम्मीदों पर पानी फिरने की वजह भी पता चल गई है। 48 दिन बाद भी हरियाणा में जाट आरक्षण आंदोलन वहीं खड़ा है, जहां से शुरू हुआ था।
वीरवार को पानीपत रिफाइनरी गेस्ट हाउस में सरकार के मंत्री समूह की तीन सदस्यीय समिति से जाट नेताओं की वार्ता के बाद आंदोलन खत्म होने के आसार लगभग बन गए थे, शुक्रवार दोपहर दिल्ली में होने वाली घोषणा का इंतजार था।
लेकिन, बात फिर 21 सीबीआई और 11 जघन्य अपराध के दर्ज मामलों को वापस लेने पर अटक गई। जाट आंदोलनकारी इन केसों को भी वापस लेने का सरकार से लिखित आश्वासन चाह रहे हैं, जिससे सरकार पहले ही मना कर चुकी है, चूंकि केस उनके विचाराधीन न होकर सीबीआई के पास या कोर्ट में हैं।
वीरवार को हुई वार्ता के बाद मानी गई सात मांगों में से अधिकांश पर सरकार पहले ही हामी भर चुकी थी, अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के अध्यक्ष यशपाल मलिक ने जब इसकी सूचना कोर कमेटी व धरनों पर बैठे अन्य जाट नेताओं को दी तो वे बिफर गए।

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