ब्रांड नेम से अलग है 'काबिल'

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-निर्माताः राकेश रोशन
-निर्देशकः संजय गुप्ता

-सितारेः ऋतिक रोशन, यामी गौतम, रोनित रॉय, रोहित रॉय

रेटिंग **


प्यार और कानून में यह समानता है कि दोनों अंधे होते हैं। फिल्म की नायिका कहती है कि दो नेगेटिव मिलकर पॉजिटिव कैसे बन सकते हैं? काबिल की कहानी में भी इन दो नेगेटिव को मिलाकर पॉजटिव बनाने की कोशिश है। बात बन नहीं पाती। कहानी में प्यार आधे रास्ते में खत्म हो जाता है और कानून शुरू से अंत तक लचर बना रहता है। ऋतिक रोशन का परफॉरमेंस छोड़ दें तो काबिल में ऐसा कुछ नहीं जो काबिल-ए-तारीफ हो। परंतु अकेले ऋतिक क्या कर सकते हैं जब स्क्रिप्ट कच्ची हो और निर्देशन तथा दृश्य संयोजन में तालमेल न बैठे। काबिल की सबसे बड़ी कमजोरी यह है कि फिल्म किसी कोण से संजय गुप्ता की बनाई नहीं लगती। या तो वह चुक गए हैं या फिर मन मार कर निर्माता राकेश रोशन की दखलंदाजी सहते हुए फिल्म बनाई। निर्माता भूल गए कि दर्शक जेब से खर्च कर खुली आंखों से फिल्म देखता है।

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