ट्रंप ने ये कानून बनाया तो 'मैडिसन स्क्वायर' कहां करेंगे मोदी?

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इससे पहले डोनाल्ड ट्रंप राष्ट्रपति पद की शपथ लें उनकी पार्टी के दो सांसदों ने अमेरिकी कांग्रेस में विवादित एच1बी वीजा में बदलाव करने के लिए संशोधन बिल पेश किया है. ये बिल यदि कांग्रेस में पास हो जाता है तो सबसे बड़ा नुकसान अमेरिका में नौकरी कर रहे भारतीय नागरिकों को होगा. डोनाल्ड ट्रंप ने चुनावी वादा किया है कि वह अमेरिका के इमीग्रेशन नियमों में मूलभूत सुधार करेंगे जिससे विदेशी मूल के लोगों का इस्तेमाल अमेरिकी नागरिकों की नौकरी लेने के लिए न किया जा सके.

क्यों विदेशियों को नौकरी देता है अमेरिका
डोनाल्ड ट्रंप की पार्टी के सांसद का कहना है कि अमेरिका को एक बार फिर दुनिया का नेतृत्व करने की जरूरत है. इसके लिए यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि दुनिया का सबसे तेज दिमाग अमेरिकी में काम करें.

मोदी का मैडिसन स्क्वायर
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपनी पहली अमेरिका यात्रा के दौरान भारतीय मूल के नागरिकों मैडिसन स्क्वायर पर संबोधित किया था. इस इवेंट को प्रधानमंत्री मोदी की पूरी दुनिया में ख्याति के साथ जोड़ा गया तो कुछ लोगों ने इसे मोदी का मैडिसन स्क्वायर भी कहा.

क्या है एच1बी में दिक्कत
अमेरिकी कंपनियों पर हमेशा आरोप लगता रहा है कि वह एच1बी वीजा का गलत इस्तेमाल करते हुए दूसरे देशों से सस्ते इमीग्रेशन कराती है. कॉस्ट कटिंग के लिए ज्यादातर नौकरियों को एच1बी वीजा से लाए जाने वाले विदेशियों के हवाले किया जा रहा है.

क्या संशोधन करेगी ट्रंप सरकार
संसद में पेश संशोधन अब एच1बी वीजा के लिए न्यूनतम सैलरी को बढ़ाकर 1 लाख अमेरिकी डॉलर करना चाहता है. इससे विदेशों से इस वीजा पर सिर्फ टॉप टैलेंट ही अमेरिका में नौकरी कर सकेंगे.

किस क्षेत्र पर असर
अमेरिकी में टेक्नोलॉजी क्षेत्र की कंपनियों पर सबसे ज्यादा आरोप लगता रहा है कि वह जिस नौकरी के लिए अमेरिकी युवाओं को रख सकता है उसके लिए वह भारत जैसे देशों के प्रीमियर इंस्टीट्यूट (आईआईटी, इत्यादी) से कम लागत वाले वर्कफोर्स को ले आते हैं. यह संशोधन पास हुआ तो सबसे ज्यादा नुकसान इसी क्षेत्र में देखने को मिलेगा.

भारत पर सीधा असर
आईटी क्षेत्र में भारत का प्रमियर इंस्टीट्यूट इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से प्रति वर्ष सबसे ज्यादा लड़के अमेरिका के आईटी क्षेत्र में कदम रखते हैं. यदि 1 लाख डॉलर सैलरी को न्यूनतम तय कर दिया जाएगा तो यद संख्या बेहद कम हो जाएगी. बचे हुए लोगों को भारत में नौकरी का मौका तलाशना होगा. इससे देश में जॉब मार्केट पर गंभीर असर के साथ-साथ देश की सरकार के लिए भी चुनौती बढ़ जाएगी. कैसे वह इस तबके को वैश्विक स्तर का रोजगार देश में ही दिलाने के लिए आर्थिक गतिविधियों को तेज करें.

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