सुभाष चंद्र बोस के सबसे करीबी शख्‍स का 117 की उम्र में निधन, पिछले साल पत्‍नी के साथ खुलवाया था बैंक अकाउंट

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आजमगढ़ (यूपी). नेताजी सुभाष चंद्र बोस के ड्राइवर और उनके सबसे करीबी रहे कर्नल निजामुद्दीन का सोमवार की सुबह करीब 4 बजे 117 साल की उम्र में निधन हो गया। वे दुनिया के सबसे ज्‍यादा उम्र तक जीवित रहने वाले लोगों में से एक थे। 116 की उम्र में खुलवाया था बैंक अकाउंट...
- बता दें, आजमगढ़ के मुबारकपुर के रहने वाले कर्नल निजामुद्दीन उर्फ सैफुद्दीन की पत्‍नी अजबुनिशा भी 107 साल की हैं। दोनों ने अप्रैल 2016 में एसबीआई की ब्रांच में ज्वाइंट अकाउंट खुलवाया था।
- यहां उन्होंने प्रूफ के तौर पर जो वोटर आईडी कार्ड और पासपोर्ट कर्नल ने पेश किया था, उसके मुताबिक उनका जन्म 1900 में हुआ था।
- स्थानीय लोग और डिस्ट्रिक्ट एडमिनिस्ट्रेशन कर्नल निजामुद्दीन के बारे में जानकर काफी खुश हुआ था कि इस तरह का एक बुजुर्ग व्यक्ति उनका पड़ोसी है।
बेटे ने बयां किया था दर्द
- बेटे अकरम ने बताया था कि उन्होंने अपने पिता को स्वतंत्रता संग्राम सेनानी की मान्यता दिलवाने की काफी कोशिश की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
- उम्र के आखिरी पड़ाव पर न ही राज्य सरकार, न ही केंद्र सरकार ने इस ओर ध्यान दिया। अब उनके पिता और मां ने ज्वाइंट अकाउंट खुलवाया।
- डीएम ने आश्वासन दिया था कि वह सरकार से कर्नल की पेंशन के लिए बात करेंगे।
- अकरम ने बताया था कि जब वह अकाउंट खुलवाने गए तो लोग हैरत में थे कि इस उम्र में एक साथ दोनों का खाता खुलना शायद दुनिया में पहली बार हुआ है।
निजामुद्दीन ने शेयर किए थे नेताजी से जुड़े फैक्ट्स
- बता दें, नेताजी सुभाष चंद्र बोस के निधन को लेकर निजामुद्दीन ने उनकी जिंदगी से जुड़ी कुछ अहम बातें शेयर की थीं।
- उन्होंने बताया था कि वह आज भी नेताजी की बात करते हुए फख्र महसूस करते हैं। उनकी बातें करते वक्त उनकी आंखें भर आती हैं।
- उनके मुताबिक, बर्मा में छितांग नदी के पास 20 अगस्त 1947 को नेताजी को उन्होंने आखिरी बार नाव पर छोड़ा था।
- इसके बाद से आज तक उनकी नेताजी से मुलाकात नहीं हुई।
- आजाद हिंद फौज के गठन की भूमिका के साथ नेताजी ने आजादी का बिगुल पूरे भारत में फूंका था और ज्यादा से ज्यादा लोगों को रंगून के जुबली हॉल में इकट्ठा होने को कहा था।
- जुलाई 1943 को बर्मा, सिंगापुर, रंगून के प्रवासी भारतीयों ने आजाद हिंद फौज के फंड के लिए 26 बोरे सोने, चांदी, हीरे-जेवरात और पैसों से नेताजी को तराजू में तौल दिया था।

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