चालान कटने के बाद बोले उत्तराखंड के DGP- कानून सबसे लिए बराबर

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उत्तराखंड के डीजीपी अनिल रतूड़ी ने नियम-कानून के पालन की एक अनोखी मिसाल पेश की है. रविवार को ट्रैफिक नियम तोड़ने पर पुलिस कर्मियों ने डीजीपी को पहचाने बिना उनका चालान कर दिया था. लेकिन लाइसेंस देख डीडीपी को पहचानने के बाद पुलिस वालों के होश उड़ गए. हालांकि डीजीपी ने विनम्रता दिखाते हुए चालान की रकम पुलिस कर्मियों को दी.  

गलती मेरी थी: डीजीपी
चालान कटने के बाद डीजीपी अनिल रतूड़ी ने 'आजतक' से बातचीत में कहा कि गलती मेरी ही थी, मैंने नियम तोड़ा लेकिन जिस समय मैंने ज़ेबरा लाइन को क्रॉस किया उसके तुरंत बाद मैंने अपनी गाड़ी पीछे करने की कोशिश की थी. लेकिन मेरे ठीक पीछे भी तब तक एक गाड़ी और खड़ी हो गई तभी पुलिस कांस्टेबल मेरे पास पहुंच गया.

लाइसेंस देखा तो पहचाना
गाड़ी किनारे लगवा कर कॉन्स्टेबल ने तुरंत पुलिस महानिदेशक का लाइसेंस मांगा जिसे लेकर वो अपने सब इंस्पेक्टर के पास पहुंचा लेकिन जैसे ही सब इंस्पेक्टर ने लाइसेंस देखा तो उसके होश उड़ गए. वह अपनी टोपी संभाल कर सीधा डीजीपी के पास पहुंचा. अपनी शालीनता का परिचय देते हुए डीजीपी रतूड़ी ने सीधे 500 रुपये का का नोट उसके हाथ में थमा कर चालान काटने को कहा. यहीं नहीं खुले पैसे न होने की वजह से अपनी पत्नी से 100 रुपए लेकर डीजीपी ने चालान की भरपाई की.

बता दें कि उत्तराखंड के DGP अनिल रतूड़ी की निजी कार का सिटी पेट्रोल यूनिट (CPU) ने रविवार दोपहर चालान काट दिया था. DGP अनिल रतूड़ी ने भी सादगी का परिचय देते हुए तुरंत चालान का भुगतान कर सिफारिशी और रसूखदार लोगों के लिए मिसाल कायम की. यह घटना रविवार दोपहर करीब 2.15 बजे की है, जब डीजीपी अनिल रतूड़ी अपनी निजी कार से राजपुर रोड स्थित दिलाराम चौक से गुजर रहे थे. इस दौरान उनकी निजी कार दिलाराम चौक स्थित सिग्नल पर जेब्रा क्रॉसिंग पार कर गई. इतने में ही CPU ड्यूटी पर तैनात सब इंस्पेक्टर अशोक डंगवाल और सिपाही अर्जुन सिंह ने डीजीपी की कार को रोककर रिकॉर्डिंग शुरू कर दी और उनसे चालान भरते को कहा था.

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