दिल्लीवालों की सेहत तो बिगाड़ ही रहा, हिमाचल-उत्तराखंड भी चपेट में

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नई दिल्ली. हवा में मौजूद नाइट्रोजन डाइऑक्साइड अब अस्थमा और चेस्ट इंफेक्शन के शिकार मरीजों के साथ हेल्दी लोगों को भी चपेट में ले रहा है। हॉस्पिटल्स में ऐसे मरीज बढ़ रहे हैं, जिन्हें केवल कफ की शिकायत है। सफदरजंग हॉस्पिटल के ईएनटी स्पेशलिस्ट डॉ. एनएन माथुर का कहना है कि उनकी ओपीडी में ऐसे मरीजों की तादाद 8-10% तक बढ़ गई है। ये मरीज बिल्कुल हेल्दी थे, लेकिन पहले इन्हें खांसी हो रही है। फिर कफ आता है, उसके बाद बुखार की चपेट में आ रहे हैं। यह पॉल्यूशन की वजह से हो रहा है। ओपीडी में आने वाले ईएनटी के 30 प्रतिशत मरीजों में 8-10 प्रतिशत ऐसे मरीजों की ही संख्या है। एक्सपर्ट्स कहते हैं कि दिल्ली का पॉल्यूशन हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड को भी अपनी चपेट में ले लेगा


- डॉ. एनएन माथुर ने बताया कि हवा में मौजूद नाइट्रोजन डाइऑक्साइड पार्टिकल्स खाने की नली (एसोफेगस) में पहुंचकर इरिटेशन करते हैं, जिससे खराश होती है और बाद में कफ आता है। - कुछ मरीज तो इलाज के लिए हॉस्पिटल पहुंच जा रहे हैं लेकिन बड़ी संख्या में मरीज अस्पताल नहीं पहुंच रहे हैं, जबकि उन्हें इलाज की जरूरत है। इस तरह की समस्या को नजरअंदाज न करें।

- सेंटर फॉर साइंस एंड एन्वायरन्मेंट (सीएसई) में एयर पॉल्यूशन कंट्रोल यूनिट के प्रोग्राम मैनेजर विवेक चट्टोपाध्याय ने बताया कि नाइट्रोजन डाइऑक्साइज की ज्यादा क्वांटिटी ही सांस की बीमारियां पैदा करती है।
- "यह गाड़ियों से निकलने वाले धुएं के कारण वातावरण में मौजूद रहती है और लंबे समय तक हवा में रहने के बाद नाइट्रोजन डाइऑक्साइड पार्टिकल्स में बदल जाती है, जो और भी घातक है।"
- "मौजूदा वक्त में हवा महज एक किमी प्रति घंटा की रफ्तार से चल रही है। ऐसा एंटी साइक्लोन इफेक्ट की वजह से हुआ है। यही वजह है कि अब स्वस्थ लोग भी बीमार पड़ रहे हैं। राजधानी में कई डॉक्टर इस पर रिसर्च कर रहे हैं।"

- इंडियन पॉल्यूशन कंट्रोल एसोसिएशन की डिप्टी डायरेक्टर राधा गोयल ने कहा कि दिल्ली का पॉल्यूशन इस कदर बढ़ रहा है कि जो लोग पहाड़ी राज्यों से दिल्ली आ रहे हैं, उनके फेफड़ों को भी यह 60-70 फीसदी तक पॉल्यूटेड कर रहा है।
- इनडोर और आउटडोर एयर पॉल्यूशन पर की गई स्टडी के तहत यह जानकारी मिली कि पीएम 2.5 और पीएम 10 का लेवल लोगों के फेफड़ों और दिल को लगातार कमजोर बना रहा है। प्रोजेक्ट सफर के निदेशक गुफरान बेग ने कहा कि दिल्ली में ज्यादातर दिन पीएम 2.5 का पॉल्यूशन लेवल 170 एमजीसीएम के पार ही रहता है, जो खतरनाक है।

सीएसई की मानें तो दिल्ली की हवा हमेशा पॉल्यूटेड रहती है। यहां महज एक महीने में लोगों को सांस लेने लायक हवा मिलती है। बाकी सभी महीने एयर क्वालिटी खराब रहती है।

प्रोजेक्ट सफर में दिल्ली का औसत पीएम 2.5 का स्तर 417 एमजीसीएम और पीएम 10 का स्तर 664 दर्ज हुआ। मौसम विभाग के मुताबिक अगले दो दिन इसी तरह से सीवियर कैटेगरी तक पॉल्यूशन लेवल दर्ज होने की संभावना है।

ऐसे मरीज जिन्हें खांसी और कफ की शिकायत है, वे खुद को सड़क किनारे उड़ने वाली धूल के एक्सपोजर से बचाएं। बेहतर होगा काम के बाद घर पहुंचते ही गुनगुने पानी से गला साफ करें।

दीपचंद बंधु हॉस्पिटल के सीनियर डॉक्टर अविनाश कुमार ने बताया कि पिछले एक हफ्ते में हर दिन अस्पतालों में 70 मरीज सांस से जुड़ी शिकायत लेकर पहुंचे हैं। उससे पहले 10 से 20 मरीज ही आ रहे थे।

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