निकाय चुनावः बागियों से परेशान कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशी, कार्रवाई नहीं होने पर रोष

कांग्रेस में निकाय चुनाव के दौरान भी घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है। नगर निगम में पार्टी के अधिकृत पार्षद प्रत्याशियों के खिलाफ लड़ने वाले कांग्रेसियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने से कार्यकर्ताओं में रोष है।
अनुशासन समिति की दो बार की बैठक में शहर के बागी प्रत्याशियों पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है। हालत यह है कि पार्टी के प्रत्याशियों को अपनी ही पार्टी के बागियों से जूझना पड़ रहा है। बनारस नगर निगम के 90 वार्डों में आधा दर्जन से ज्यादा बागी उम्मीदवार मैदान में हैं।

यहां तक कि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की सदस्य पूर्व पार्षद व वरिष्ठ महिला नेता नीलम खान जो वार्ड नंबर 46 से पार्टी की अधिकृत प्रत्याशी हैं वहां उनके विरुद्ध महानगर कांग्रेस कमेटी की सचिव महजबीं बागी उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ रही हैं।

उधर वार्ड नंबर 62 लक्सा वार्ड से कांग्रेस प्रत्याशी पवन मौर्या के खिलाफ रोहित चौरसिया मैदान में हैं। जिला चुनाव संचालन समिति ने जब 29 अक्टूबर को 37 प्रत्याशियों की सूची जारी की थी तो उस सूची में पवन मौर्या का नाम था लक्सा वार्ड से लेकिन बाद में प्रदेश कांग्रेस कमेटी से स्वीकृत सूची में रोहित की जगह पवन मौर्या का नाम दर्ज हो कर आया। उन्हें पार्टी ने सिंबल दिया।
अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी

 वैसे रेखा शर्मा के निष्कासन और अन्य बागियों को चुनाव लड़ने की खुली छूट देने के जिला व महानगर कांग्रेस पदाधिकारियों की नीति पर कांग्रेस के आम नेताओं और कार्यकर्ताओं में रोष है।  कार्यकर्ताओं का कहना है कि पार्टी ने रेखा शर्मा के मामले में तो त्वरित कार्रवाई की पर भुवनेश्वर द्विवेदी, शंभु नाथ बाटुल, राम प्रकाश ओझा, विकास तिवारी के बारे में अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। ये सभी बागी रहे। यहां तक इन्होंने विधानसभा चुनाव में पार्टी प्रत्याशी अनिल श्रीवास्तव के खिलाफ  मोर्चा खोला था। तब उनके खिलाफ  भी कार्रवाई होनी चाहिए थी। उल्टे विकास तिवारी और शंभुनाथ बाटुल को पार्षद का टिकट भी दे दिया गया। विकास तिवारी ने तो बीच में पार्टी छोड़ कर आम आदमी पार्टी ज्वाइन कर ली लेकिन न तब उन्हें पार्टी से निकाला गया न अब। बंधु कच्ची बाग में भी कांग्रेस की घोषित प्रत्याशी ने नाम वापसी कर ली। जिला अध्यक्ष प्रजानाथ शर्मा ने दावे से कहा था कि बागी प्रत्याशियों और उनका समर्थन करने वालों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई अवश्य की जाएगी। चाहे वह कितना ही बड़ा रसूखदार क्यों न हो। जिला व महानगर कमेटी के ओहदेदारों की ओर से कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं होने से प्रत्याशियों में रोष है। 

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