लीलन और रैमी के रेशों का पहला वस्त्र उद्योग डीनापानी में लगेगा

अल्मोड़ा के डीनापानी में जल्द ही लीलन और रैमी के प्राकृतिक रेशे से वस्त्र बनाने का उद्योग स्थापित किया जा रहा है। इसके लिए पांच करोड़ रुपये मंजूर हो गए हैं। डीनापानी में 50 नाली भूमि भी उपलब्ध करा दी गई है। अभी तक लीलन और रैमी के कपड़ों के उत्पादन के लिए कच्चा माल देश में उपलब्ध नहीं होता। अब प्रयोग के तौर पर इसका रेशा यहीं तैयार करवा दिया गया है।
केंद्रीय कपड़ा राज्य मंत्री अजय टम्टा ने बताया कि मंत्री पद संभालने के बाद उन्हें पता लगा कि लीलन और रैमी के धागे से बने कपड़े काफी महंगे बिकते हैं और देश में इसकी काफी मांग है, लेकिन इसका कच्चा माल बेल्जियम से मंगाना पड़ता है। तभी उन्होंने इसका कच्चा माल देश के भीतर ही तैयार करवाने की ठान ली। उन्होंने इसके लिए विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान अल्मोड़ा, जीबी पंत पर्यावरण संस्थान कोसी कटारमल, पंतनगर कृषि विवि और प्रतापगढ़ स्थित शोध संस्थान के वैज्ञानिकों से विचार-विमर्श किया।

टम्टा ने बताया कि उन्होंने वैज्ञानिकों से लीलन और रैमी का बीज तैयार कराने को कहा। एक साल पहले बाहर से कुछ बीज मंगवाकर स्थानीय स्तर पर बीज तैयार करवाया गया और बाद में परीक्षण के तौर पर विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के हवालबाग परिक्षेत्र में लीलन और रैमी के पौधे उगाए गए।

उन्होंने बताया कि वहां उगाए गए पौधों से हाल ही में रेशा निकालकर उसका धागा भी बनाया गया है। टम्टा ने बताया कि परीक्षण सफल होने के बाद  लीलन और रैमी का 5.50 क्विंटल बीज तैयार कर लिया गया है। अब इस बीज से साढ़े पांच हजार किलो बीज तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने बताया कि लीलन और रैमी के रेशों से नए-नए डिजाइन के कपड़ों के अलावा घरेलू साज सज्जा की सामग्री तैयार करने का पहला उद्योग अल्मोड़ा के डीनापानी में लगाया जा रहा है।

इस उद्योग के लिए पांच करोड़ रुपये लागत से विभिन्न तरह की 12 मशीनें लगाई जाएंगी। मशीन लगाने का काम मार्च तक हो जाएगा और 2018 में ही इस उद्योग में उत्पादन भी शुरू हो जाएगा। इस उद्योग में करीब 200 से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलने की उम्मीद है, जबकि लीलन और रैमी की खेती करके अल्मोड़ा, बागेश्वर, चंपावत और पिथौरागढ़ समेत पहाड़ के अन्य जिलों के हजारों काश्तकार अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार प्राप्त कर सकेंगे।

उन्होंने बताया कि लीलन और रैमी को बंदर भी नुकसान नहीं पहुंचाते। इस मौके पर विधानसभा उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह चौहान, भाजपा जिलाध्यक्ष गोविंद सिंह पिलख्वाल, नगर अध्यक्ष कैलाश गुरुरानी, पूर्व जिलाध्यक्ष ललित लटवाल, तारु साह आदि भी मौजूद थे।

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