सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला, अब सिनेमाघर में राष्ट्रगान बजाना जरूरी नहीं

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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अपने 30 नवंबर 2017 के आदेश में संशोधन करते हुए कहा कि देशभर के सिनेमाघरों में राष्ट्रगान बजाना अनिवार्य नहीं है. इससे पहलेे सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में केन्‍द्र सरकार ने कहा था कि फिलहाल राष्ट्रगान को अनिवार्य ना बनाया जाए. केंद्र ने हलफनामा दाखिल कर कहा कि केंद्र सरकार ने इंटर मिनिष्ट्रियल कमेटी बनाई है जो छह महीने में अपने सुझाव देगी.  इसके बाद सरकार तय करेगी कि कोई नोटिफिकेशन या सर्कुलर जारी किया जाए या नहीं. केंद्र ने कहा है कि तब तक 30 नवंबर 2016 के राष्ट्रीय गान के अनिवार्य करने के आदेश से पहले की स्थिति बहाल हो.

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिए थे कि वह एक दिसंबर 2016 के अपने आदेश में सुधार कर सकता है. इसी आदेश के तहत देशभक्ति और राष्ट्रवाद की भावना पैदा करने के मकसद से सिनेमाघरों में फिल्म के प्रदर्शन से पहले राष्ट्रगान बजाना और दर्शकों के लिये इसके सम्मान में खड़ा होना अनिवार्य किया गया था. न्यायालय ने कहा था कि जब राष्ट्रगान और राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान दर्शाया जाता है, तो यह मातृभूमि के प्रति प्रेम और सम्मान को दर्शाता है. न्यायालय ने श्याम नारायण चोकसी की जनहित याचिका पर सभी सिनेमाघरों में फिल्म का प्रदर्शन शुरू होने से पहले अनिवार्य रूप से राष्ट्रगान बजाने के निर्देश दिए थे.

हाल ही में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक शपथपत्र दाखिल कर कहा था कि सिनेमाघरों में फिल्म से पहले राष्ट्रगान बजाना और उस दौरान खड़ा होना अनिवार्य न हो. सरकार की ओर से कहा गया था कि मंत्रालय समिति अभी इस पर विचार कर रही है. मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर केंद्र सरकार ने पांच दिसंबर को अंतर मंत्रालय समिति का गठन किया था.


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