आपातकालीन ,हिमाचल को लूटने की हौड़ में जांच की आंच में तपने लगा सचिवालय । सेनितज़र घोटाले का सच ।

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नवनीत बत्ता ,हिमाचल

दान करने को दिए थे सेनेटाइजर। anv news ने प्रमुखता से उठाया था मुद्दा ।

शिमला मैंचर्चित सैनिटाइजर घोटाला की जांच निर्णायक होने लगी है और जांच की आंच में बीजेपी सरकार अब चाहे अपने हो या बेगाने फाइनल शॉट के मूड में है । सचिवालय में सेनेटाइजर घोटाले की परतें खुलने लगी हैं। सूत्रों के अनुसार जो सेनेटाइजर सचिवालय प्रशासन को बेचे गए वह किसी कंपनी ने किसी व्यक्ति को डोनेट करने के लिए दिए थे। डोनेट करने के लिए आए सेनेटाइजर को यहां बेच दिया गया, जिससे साफ है कि कितना बड़ा घोटाला यहां पर किया गया है। अभी विजीलेंस की जांच में सब कुछ साफ होगा। विजीलेंस ने इस मामले में अपनी जांच को तेज कर दिया है। उसने सीसीटीवी फुटेज भी लिए हैं, वहीं संबंधित विभागों से जानकारी जुटाई जा रही है। बताया जाता है कि सेनेटाइजर की खेप में लगे बैच नंबर व कंपनी से इसके बारे में पता किया गया है कि उसने इन्हें किसे बेचा था। स्वास्थ्य विभाग ने यह जानकारी जुटाकर विजीलेंस को दी है, जिसमें निर्माता कंपनी ने बताया कि एक व्यक्ति को यह सेनेटाइजर डोनेट करने के लिए दिए गए थे। डोनेट करने की बजाय उसने सचिवालय के अधिकारियों व कर्मचारियों के साथ सांठ-गांठ करके उसे बेच दिया। इसमें एक कांट्रेक्टर का सहारा लिया गया, जिसके पास इसे बेचने का लाइसेंस भी नहीं था। आखिर बिना लाइसेंस के कैसे उस कांट्रेक्टर से सेनेटाइजर की खरीद कर ली गई यह बड़ा सवाल है। इसमें सचिवालय के कौन-कौन से अधिकारी व कर्मचारी मिले हुए हैं इसका पर्दाफाश होना है। विजीलेंस इसकी जांच कर रही है। विजीलेंस ने जो रिकार्ड लिया है, उसके मुताबिक जल्दी ही वह दोषियों तक पहुंच जाएगी। सूत्रों के अनुसार इस मामले में राजनीतिक हस्तक्षेप होने के चलते थोड़ा परेशानी भी हो रही है, क्योंकि इसमें भाजपा का एक नेता शामिल है जो पहले पार्टी छोड़ चुका है और अब दोबारा से पार्टी में जुड़ा है। सचिवालय में जिस अधिकारी को प्रशासन ने बदला है, उसके पास संबंधित शाखा का चार्ज था और कहीं न कहीं वीडियो फुटेज में भी वह अधिकारी दिखाई दे रहा है। इतना ही नहीं, सेनेटाइजर की बोतलों पर ठप्पा लगाने के लिए जिन दो कर्मचारियों को उस दिन बुलाया गया था, उन्होंने ठप्पे लगाने से इनकार कर दिया और इसके बारे में लिखित में उन्होंने अपना जवाब भी प्रशासन को दिया है। विभागीय जांच के इस जवाब में कर्मचारियों ने संबंधित अधिकारी का नाम लिखा है। यह एक बड़ा सुबूत विजीलेंस के पास है। जो रिकार्ड विजीलेंस ने लिया है उसमें यह दस्तावेज भी शामिल हैं। बहुत जल्द इन सब बातों का खुलासा विजीलेंस कर देगी, जिसके राडार पर सचिवालय की वह लॉबी है जोकि सांठ-गांठ करती आई है। ऐसे लोगों को लेकर सचिवालय में चर्चा तेज है।

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