जीवन में नैतिक मूल्यों को अपने जीवन में आत्मसात करने वाला, कठिन से कठिन परिस्थितियों को आसानी से पार कर जाता है।

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राजकीय महाविद्यालय जुखाला में चल रहे सात दिवसीय एनएसएस शिविर के छठे दिन स्वयंसेवियों ने योग साधना से दिन की शुरूआत की। तत्पश्चात कालेज को आने वाली सड़क के इर्दगिर्द उगी अवांछित झाडिय़ों को उखाड़ा तथा रास्तों आदि को सुंदर बनाया। एनएसएस शिविर की कार्यक्रम अधिकारी प्रो. नम्रता पठानिया ने बताया कि मंगलवार को सेवानिवृति प्रो. सुदर्शन कुमार (हिंदी विषय) ने स्त्रोत व्यक्ति के रूप में बच्चों से रूबरू हुए। उन्होंने बच्चों का मौजूदा परिस्थितियों और नैतिक मूल्यों के बारे बच्चों का मार्गदर्शन किया। प्रो. सुदर्शन कुमार ने बताया कि नैतिक मूल्य जीवन में उसी प्रकार जरूरी होते हैं जिस प्रकार शरीर को शुद्ध वायु की आवश्यक्ता होती है। उन्होंने कहा कि भारतीय सनातन संस्कृति बहुत महत्वपूर्ण और अनमोल है। यदि मनुष्य जीवन में नैतिक मूल्यों को अपने जीवन में आत्मसात करता है तो कठिन से कठिन परिस्थितियों को वह आसानी से पार कर जाता है। उन्होंने भारतीय संस्कृति में पाश्चात्य संस्कृति की घुसपैठ को अनैतिक करार देते हुए कहा कि मौजूदा परिवेश में देखादेखी की होड़ है और नई पीढ़ी इस ओर तेजी से अग्रसर होते हुए पतन की ओर जा रही है। जो कि कोई शुभ संकेत नहीं है। प्रो.सुदर्शन कुमार ने कहा कि माता पिता और गुरूजनों की छत्रछाया में रहकर अनुशासनवान होकर मानवता की सेवा करना ही जीवन का वास्तविक मर्म है। वहीं कार्यक्रम अधिकारी प्रो. नम्रता पठानिया ने स्वयंसेवियों को नशे के दुष्परिणामों के बारे में विस्तार से बताया और नशे व्यसन आदि से दूर रहने की शपथ दिलाई। प्रो. नम्रता पठानिया ने बताया कि बुधवार को एनएसएस शिविर का समापन होगा तथा इस कार्यक्रम में सेवानिवृत प्राचार्या प्रो. बृजबाला सांख्यान बतौर मुख्यातिथि शिरकत करेंगी। 

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