प्रदेश में स्थापित होंगे चार अतिरिक्त कृषि विज्ञान केन्द्र

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चौधरी सरवण कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय में रबी फसलों पर राज्य स्तरीय कृषि अधिकारी कार्यशाला आयोजित

प्रदेश में स्थापित होंगे चार अतिरिक्त कृषि विज्ञान केन्द्।

आमिर बेदी। पालमपुर

चौधरी सरवण कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय में आज रबी फसलों पर राज्य स्तरीय कृषि अधिकारी कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्घाट्न करते हुए मुख्य अतिथि कुलपति प्रो. हरीन्द्र कुमार चौधरी ने घोषणा की कि नवप्रवर्तशील किसानों विशेषकर ऐसे किसान जो विश्वविद्यालय की तकनीकों को अपनाकर दूसरे किसानों तक प्रसारित करते हैं, वे सम्मानित किए जाएंगे। पर्वतीय कृषकों की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि भविष्य में ऐसी कार्यशालाओं तथा किसानों से सम्बन्धित कार्यक्रमों में अधिक से अधिक किसानों को सम्मिलित करके आमन्त्रित किया जाएगा तथा विश्वविद्यालय किसानों से सम्बन्धित कार्यक्रमों का आयोजन उनके खेतों में करेगा।

कुलपति ने किसानों से कहा कि वे विश्वविद्यालय द्वारा विकसित व स्वीकृत किस्मों की ही बिजाई करें ताकि बाद में किसी प्रकार का नुकसान सहन न करना पड़े। प्रो. चौधरी ने कहा कि वैज्ञानिकों व कृषि अधिकारियों के सामूहिक प्रयत्नों से ही नवीन तकनीकों का लाभ किसानों तक पहुंच सकता है। उन्होंने कहा कि भारतीय कृषि अनुसन्धान परिषद् ने जनजातिय क्षेत्रों के लिए 94 लाख की एक परियोजना स्वीकृत की है जिसके अन्तर्गत लाहौल-स्पीति के किसानों को 3000 व्हील-हो हल दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि भारतीय कृषि अनुसन्धान परिषद् को प्रदेश में चार अतिरिक्त कृषि विज्ञान केन्द्र स्थापित करने के लिए एक प्रस्ताव भेजा गया है। उन्होंने वैज्ञानिकों की फसलों की नई किस्में विकसित करने तथा तथा राई घास की संस्तुतियां जारी करने हेतु उनकी प्रशंसा की।

हिमाचल प्रदेश कृषि विभाग के निदेशक डा. एन.के. बधान ने रबी फसलों के लिए बीज, खाद इत्यादि कृषि आदानों के प्रबन्धों पर विस्तार से जानकारी दी। इस अवसर पर उन्होंने कृषि उत्पादन बढ़ाने हेतु प्रदेश सरकार की 650 करोड़ रू. की विभिन्न योजनाओं की भी जानकारी दी तथा किसानों से कहा कि वे इन योजनाओं का लाभ उठाएं। उन्होंने कहा कि लगभग चार लाख किसान सब्जियों की खेती कर रहे हैं तथा प्रदेश के किसानों को पीले रतुए के प्रति रोग रोधी गेहूं की 82700 क्विंटल उच्च गुणवत्ता का बीज उपलब्ध करवाया जाएगा।

शोध निदेशक डा. डी.के. वत्स ने जानकारी दी कि विश्वविद्यालय द्वारा विकसित अन्न, दलहन व चारा फसलों की किस्मों को राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृति मिली है तथा 16 अन्य किस्मों को स्टेट वैरायटी रिलीज कमेटी के पास स्वीकृति हेतु प्रेषित किया गया है। वर्ष 2019-20 में विभिन्न फसलों के 1800 कि.ग्रा. न्यूक्लियस सीड, 56400 कि.ग्रा. ब्रीडर सीड तथा 31150 कि.ग्रा. आधार बीज उत्पादित किया। किसानों के लिए आठ उत्पादन तकनीकों की संस्तुतियां भी जारी की गई।

प्रसार शिक्षा निदेशक डा. वाई.पी. ठाकुर ने इस अवसर पर प्रसार गतिविधियों की विस्तार से जानकारियां दी। उन्होंने कहा कि कोविड महामारी के बावजूद, गत दिनों कृषि विज्ञान केन्द्रों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम जारी रखे जिससे लगभग 8000 किसान लाभान्वित हुए। लगभग छः लाख मैसेज इलैक्ट्रानिक व सोशल मीडिया के माध्यम से किसानों को प्रेषित किए गए।

इस अवसर पर कृषि महाविद्यालय के डीन डा. आर.के. कटारिया, डा. सुरेश कुमार व डा. रविन्द्र सिंह राणा ने भी अपने विचार रखे। हिमाचल प्रदेश कृषि विभाग के अतिरिक्त निदेशक डा. दौलत राम राजू, आतमा के परियोजना निदेशक डा. डी.के. अवस्थी, विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों, मण्डी के प्रगतिशील किसानों सुन्का राम, सीता राम वर्मा, सुनीता देवी व परमाराम चैधरी, उना से मन्जीत सिंह व मोहिन्द्र टोहरा, बिलासपुर से अजय रत्न व जगदीश चन्द, कुल्लू से जसवन्त सिंह व टी.एस. नेगी, हमीरपुर से बलजीत सन्धु व रमेश कुमार इत्यादि ने कार्यशाला में सक्रियता से भाग लिया। इन प्रगतिशील किसानों को कुलपति ने सम्मानित भी किया। इस अवसर पर कांगड़ा के छः प्रगतिशील किसानों को गेहूं का उच्च गुणवत्ता का छः क्ंिवटल बीज भी दिया गया। कार्यशाला में बीज मात्रा बढ़ाने, किसानों की आय बढ़ाने, प्राकृतिक खेती, नव-कृषि रसायनों व जैव कीटनाशकों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। मुख्य अतिथि ने इस अवसर पर प्रसार शिक्षा से सम्बन्धित कुछ प्रकाशनों का भी विमोचन किया जिनमें रबी व खरीफ फसलों पर पैकेज आॅफ प्रैक्टिस भी शामिल थीं। कार्यशाला में कोविड-19 से सम्बन्धित दिशा निर्देशों का पूरी तरह से पालन किया गया।

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