शिमला । रामपुर बुशहर मेंं महाराष्ट्र के पुणे रेड जॉन से दो नेपाली शिमला जिले के सैज बिना पुख्ता प्रमाण के कैसे पहुँचे इसे ले कर सरकार और सरकार ने तैनात किए नोडलाधिकारियो की कार्यप्रणाली पर प्रश्न चिन्ह लग गया है। बिना पुख्ता पते के दोनो को पुणे से हिमाचल के ऊना ट्रेन में टिकट से ले कर ऊना से शोगी व फिर सैज पहुँचाने में कैसे मदद हुई। जबकि दोनो लोग अपने को नेपाली बता रहे है और जब उन के आधार जांचे गए तो उन में पता एक का अकील शाह पुत्र फरीद शाह नरुपुरा, कटका अलीगढ़, उत्तरप्रदेश व दूसरे का पता शिवम सिंह पुत्र रघुबर सिंह स्लैन रीवा मध्यप्रदेश है। अबयहां तक आने की इजाजत पर सरकार और सरकारी तंत्र की ईमानदारी पर उंगली उठ रही है। कुमार सैन उपमण्डल के सैज पहुँचने के बाद दोनों नेपालियों को लगभग 15 घंटे से अधिक समय तक नेशनल हाइवे के बीच मे बने पार्क में रखा गया। रात भी दोनो ने पार्क में ही गुजारी । दोनो को सैज से आगे लुहरी में गंतव्य स्थान जाने से इस आधार पर रोका गया कि उनके पास कोई भी आनी रहने का पुख्ता पता नहीं था। केवल वह किसी के मार्फत वहां जाना चाहते थे।आज पार्क से दोनो को रामपुर नगर परिषद की कूड़ा उठाने वाली गाड़ी में बिठाकर ज्यूरी कोटला इंस्टीट्यूशनल क्वारन्टीन सेंटर पहुंचाया गया । उठाए जा रहे हैं कि दोनों नेपाली महाराष्ट्र के पुणे से कैसे हिमाचल के ऊना आने वाली ट्रेन में टिकट हासिल कर पहुंच गए और उसके बाद बस में शोगी और वहां से शिमला ज़िला के सैज।इतना ही नहीं दोनों ही नेपाली जो पुणे के होटल में काम करते थे । दूसरी ओर कई हिमाचल के लोग बाहरी राज्यो में फंसे हैं । सरकार ने सामंजस्य के लिए जो नोडल अधिकारी बना रखे उन से बाहरी राज्यो में फंसे लोगों खास कर अध्ययन कर रहे बच्चो को लाने की गुहार लगाई जा रही है। लोगो की शिकायत है कि नोडल अधिकारी कई बार सम्पर्क करने पर भी फोन अटेंड नही कर रहे है। ऐसे ही एक अभिभावक रामपुर निवास अशोक कुमार ने बताया कि उन का पुत्र मद्रास में फंसा है। उन का बेटा 26 वे मंजिल की फ्लेट में है, उस के साथ रहने वाले सभी छात्रों को सम्बंधित राज्यो की सरकारों ने वापिस घर पहुंचा दिया है।अब अकेले उन का बेटा वहाँ है, फ्लेट का मासिक किराया 70 हजार ।उस के अलावा बिजली पानी अलग। अशोक कुमार ने बताया पुणे से तो नेपाली भी हिमाचल पहुंचाए जा रहे है, लेकिन वे हफ़्तों से सम्बन्धित नोडल अधिकारी से सम्पर्क कर रहे थे एक हफ्ते तक फोन नही उठाया, जब शिकायत एक विधायक और मंडी के सांसद से की उस के बाद फोन उठाया गया मगर उतर संतोषजनक नही। उन्होंने सरकारी व्यवस्था पर अफसोस जताया है। उधर एसडीएम आनी चेत सिंह ने बताया कि दोनो नेपालियो का पुख्ता पता आनी क्षेत्र का नही था, किसी के मार्फ़त पते पर भेजना सम्भव नही था । दोनो अपने को नेपाली बता रहे थे और आधार में पता अलग।एसडीएम रामपुर नरेंद्र चौहान ने बताया कि दोनों को कोटला संस्थागत कवरन्टीन सेटर भेज दिया है। जैसे ही रामपुर वाली बस में उन के आने की सूचना मिली आनी को इस कि सूचना दी गई और बताया गया था कि उन्हें आनी के निथर पहुँचा दिया जाएगा। लेकिन जब आज भी उन्हें सम्बंधित क्षेत्र नही ले जाया गया तो रामपुर प्रशासन की ओर से कोटला पहुँचा दिया गया है। प्रधान सचिव आपदा प्रबंधन हिमाचल प्रदेश एवं चीफ नोडल ऑफिसर माइग्रेशन ओंकार शर्मा का कहना हैकि पास के लिए ऑन लाइन आवेदन किया गया था , उस मे प्रमाण नही होते है, सरकारी स्तर पर चूक नही हुई है। लेकिन अब सभी जिलों के ज़िलाधिशो को निर्देश दिए जा रहे हैकि जो भी बाहर से व्यक्ति प्रदेश में आता है उस को कहां उतारा जाना है, जवाबदेही व्यवस्था हो।

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