मलकवाल में काली माता मन्दिर में भंडारे का आयोजन

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himachal

नर सेवा नारायण सेवा’ अक्सर हमनें यह कहावत कई बार सुनी है पर इसे चरितार्थ होता हुए देखने के अवसर बड़े कम देखने को मिलते है|लेकिन इसी कहावत को अमलीजामा पहनाया है नूरपुर विधानसभा के सद्वां-सुल्याली क्षेत्र निवासियो का जिन्होंने एक असहाय लड़की को उनके परिजनों से मिलवाकर एक बहुत ही पुनीत कार्य को अंजाम दिया है|सदवां क्षेत्र के समाजसेवी मणिमहेश यात्रियों के लिए मलकवाल में काली माता मन्दिर में भंडारे का आयोजन करते है जो लगभग इक्कीस दिन चलता है|इस लंगर के दौरान इनके पंडाल में यह लड़की आई थी जिसने खाना खाने के साथ वहां रात गुजारने की बात कही|इस लंगर भवन में डेढ़ सौ से दो सौ यात्री रोजाना रात गुजारते थे|इसलिए कमेटी सदस्यों ने उसे ठहरने की इजाजत दे दी|लेकिन बाद में उन्होंने देखा कि यह लडकी जो करीब अट्ठारह वर्ष की है वो मानसिक रूप से कमजोर है और दिव्यांग भी है|जब उन्होंने उससे घर का पता पुछा तो वो स्पष्ट नहीं बता सकी|वो सिर्फ नौरोजावाद का ‘ग्राम बड़ा’ गांव बता रही थी|इस जगह का पता लगाने में इन स्वयंसेवियों को बहुत मशक्कत करनी पड़ी लेकिन अंततः उन्होंने इसके घर का पता लगा दिया|वहां के पुलिस ठाणे में किसी तरह सम्पर्क करने पर इनको पता चलता है कि यह युवती जिसका नाम अनीता बैगा है जो आदिवासी समुदाय की है और वहां से बीस दिन पहले घर से नाराज होकर निकल गई थी|वो छतीसगढ़ से जम्मू तवी आने वाली ट्रेन में बैठकर पठानकोट पहुँच गई|वहां से किसी बस से बैठकर वो लंगर में पहुँच गई|जहाँ पहुँचने के बाद इन लंगर सेवा करने वाले स्वयंसेवियों के लिए यह सबसे बड़ा उत्तरदायित्व बन गया कि वो वैसे इसे उसके परिजनों तक पहुँचाया जाए|जब घर वालों से सम्पर्क किया गया तो उन्होंने पहले तो आने की बात कही लेकिन बाद में गरीबी और घर-गांव से बाहर कभी ना निकलने के कारण उन्होंने आने में असमर्थता जताई|बाद में कमेटी सदस्यों राजेश टोनी,विक्रम हीर,राजेश शर्मा और संजय कुमार ने फैंसला किया कि वो खुद इस लड़की को उसके घर पहुंचाएगे|बाद में अपनी निजी गाड़ियों में यह देवदूत सत्रह सौ किलोमीटर दूर इस लडकी को उनके परिजनों के पास छोड़ आये|राजेश टोनी जो सद्वां पंचायत के पूर्व प्रधान है उनका कहना है कि वो समाज सेवी है और उनकी सत्तर प्रतिशत समय समाजसेवा में ही गुजरता है|लेकिन जो ख़ुशी उन्हें इस युवती को उसके परिजनों के पास छोड़ने के बाद मिली उसका वर्णन वो शब्दों में नहीं कर सकते|

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