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लोकसभा चुनाव प्रचार में बड़ा बदलाव , अब 70 नहीं 95 लाख में होगा प्रचार

लोकसभा चुनाव के प्रत्याशियों को आयोग ने बड़ी राहत दी है। प्रचार के खर्च की सीमा में 25 लाख रुपए की बढ़ोतरी की गई है। इस बार उम्मीदवार प्रचार पर 95 लाख रुपए तक का खर्च कर पाएंगे। 2019 के लोकसभा चुनाव में खर्च की यह सीमा 70 लाख रुपए थी। 25 लाख रुपए अतिरिक्त मिलने की वजह से अब उम्मीदवारों का प्रचार प्रभावित नहीं होगा। दरअसल, बीते चुनाव में 70 लाख की खर्च सीमा होने की वजह से कई नेता चुनाव के कुल खर्च के बेहद करीब पहुंच गए थे। निर्वाचन विभाग ने जनसभा में बांटी गई पानी की बोतलों से धाम तक का हिसाब अपने पास रखा था। केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर के हिस्से एक लाख रुपए से ज्यादा का खर्च कोल्ड ड्रिंक का जोड़ा गया था। बीते चुनाव में खर्च के मामले में शिमला में भाजपा के उम्मीदवार सुरेश कश्यप 70 लाख के सबसे करीब पहुंचे थे। उन्होंने प्रचार पर 67 लाख दस हजार रुपए खर्च होने की जानकारी निर्वाचन विभाग को दी थी। यह खर्च तय सीमा से महज दो लाख 90 हजार रुपए ही कम था, जबकि मंडी से रामस्वरूप शर्मा ने उस समय करीब 66 लाख रुपए प्रचार पर खर्च किए थे। वह अपने तयसीमा से चार लाख रुपए दूर रह गए थे और इस श्रेणी में तीसरे नंबर पर हमीरपुर संसदीय क्षेत्र से कांग्रेस के उम्मीदवार रामलाल ठाकुर थे, जिन्होंने 65 लाख 96 हजार रुपए प्रचार पर खर्च होने की जानकारी निर्वाचन विभाग को दी थी। गौरतलब है कि प्रदेश में चार लोकसभा सीटों पर चुनाव हो रहे हैं। ये सीटें सभी 68 विधानसभा क्षेत्रों में शामिल हैं। इन क्षेत्रों में प्रचार करने के लिए उम्मीदवारों को रैलियों, भीड़ जुटाने और एक जगह से दूसरी जगह जाने के लिए वाहनों की जरूरत रहती है। ऐसे में प्रचार खर्च की सीमा बढ़ाने का फायदा अब प्रत्याशियों को मिलेगा। मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनीष गर्ग ने बताया कि इस बार लोकसभा के प्रत्याशी 95 लाख रुपए तक खर्च कर पाएंगे, जबकि विधानसभा में खर्च की सीमा में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इन उपचुनाव में खर्च की सीमा 40 लाख रुपए ही रखी गई है। इन सभी विधानसभा क्षेत्र में चुनाव लडऩे वालों को भी खर्च का हिसाब निर्वाचन विभाग के पास जमा करवाना होगा। 40 लाख रुपए से अधिक धनराशि खर्च होती है, तो संबंधित उम्मीदवार पर निर्वाचन विभाग नियमानुसार कार्रवाई कर सकता है। विधानसभा में प्रचार की यह सीमा मुख्य चुनाव में भी 40 लाख रुपए ही थी।  लोकसभा चुनाव से खर्च का पुराना नाता है। शुरुआत में 1952 में पहली बार चुनाव में खर्च की सीमा 25 हजार रुपए तय की गई थी। फिर महंगाई और जनसंख्या को देखते हुए इसमें समय-समय पर बढ़ोत्तरी की जाती रही है। अब इस चुनाव में इस सीमा में 25 लाख रुपए की बढ़ोत्तरी की गई है और अब प्रत्याशी 95 लाख रुपए तक खर्च कर पाएंगे।

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