धान की कटाई के अवशेषों से बनेगी बायोगैस

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धान की कटाई के बाद बचे अवशेषों आदि से बायोगैस बनाने वाला देश का पहला संयंत्र लगाया जा रहा है हरियाणा के करनाल जिले में ,यह कदम किसानों द्वारा प्रणाली के अवशेषों को खेतों में जलाने की प्रवृत्ति में कमी लाने के प्रयासों के तहत उठाया गया ,इस बायोगैस का इस्तेमाल सीएनजी वाहनों में किया जा सकता है, देश की सबसे बड़ी सीएनजी वितरक कंपनी इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड के अधिकारी ने बताया कि उसके प्रबंधक निदेशक पीएस रंगनाथन ने 18 अक्टूबर को करनाल में संयंत्र का भूमिपूजन किया । किसानों द्वारा धान के अवशेषों को आग लगाने पर जल्द काबू पाया जाएगा । बढ़ते पराली जलाने से हो रहे प्रदूषण पर लगाम लग सकती है । धान की कटाई के बाद बचे अवशेषों आदि से बायोगैस बनाने वाला देश का पहला संयंत्र करनाल के घरौंडा के गांव कौंड में लगाया जा रहा है जिसका भूमि पूजन बीते 18 अक्टूबर को देश की सबसे बड़ी सीएनजी वितरक कंपनी इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड लिमिटेड के प्रबंधक निर्देशक पी एस रंगनाथन ने किया ।कंपनी के अधिकारी अंकुश जैन ने बताया कि विशेष मशीनरी द्वारा धान की पराली को काट कर उसका गट्ठर बनाया जाएगा ताकि प्रणाली का पूरे साल भर के लिए भंडारण बनाया जा सके और संयंत्र चलता रहे इस संयंत्र की क्षमता साल में 20 हजार एकड़ धान के खेतों की पराली को बायोगैस में बदलने की होगी ।कंपनी इस बायोगैस का वितरण करनाल में ही करेगी ।उन्होंने बताया कि संयंत्र मई 2020 तक तैयार हो जाएगा । सतत योजना के तहत अजय बायोगैस एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड बना रही है । उन्होंने अपने बयान में कहा कि संयंत्र के हर दिन अधिकतम 10 किलोग्राम बायोगैस का उत्पादन होगा । मुख्य कच्चा माल के तौर पर धान की पराली का इस्तेमाल होगा ।इसकी क्षमता हर साल 40 हजार टन पराली की खपत करने की होगी । इससे तैयार बायोगैस का इस्तेमाल ट्रैक्टर वह अन्य भारी मशीनों के साथ जनरेटर के लिए किया जा सकता है । संयंत्र से प्राप्त अवशेष जैविक होंगे और इसका इस्तेमाल जैविक खेती के बाद खाद के तौर पर किया जा सकेगा ।

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