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हिमाचल में सामने आए पुलिस भर्ती पेपर लीक केस में कांग्रेस एस.आई.टी. जांच से सहमत नहीं – उपाध्यक्ष नरेश चौहान

हिमाचल में सामने आए पुलिस भर्ती पेपर लीक केस में कांग्रेस एस.आई.टी. जांच से सहमत नहीं है। प्रदेश कांग्रेस के उपाध्यक्ष नरेश चौहान ने मंगलवार को पार्टी मु यालय राजीव भवन में आयोजित पत्रकार वार्ता में ये बात कही। उन्होंने कहा कि पुलिस विभाग ने ही कांस्टेबल भर्ती की परीक्षा आयोजित करवाई और पेपर सैट किया तथा प्रिंट करवाया। ऐसे में जब पूरी प्रकिया विभागीय अधिकारियों की ही देखरेख में हुई तो उसी विभाग की एस.आई.टी. से निष्पक्ष जांच की उम्मीदें नहीं की जा सकती है।  

नरेश चौहान  ने कहा कि पेपर लीक केस की जांच मु यमंत्री ने सी.बी.आई. से करवाने की बात कही लेकिन अभी तक सी.बी.आई. नहीं आई है। ऐसे में मुख्यमंत्री जो कह रहे है, वह भी नहीं हो रहा है। इससे भाजपा सरकार से जनता का विश्वास उठने लगा है।  उन्होंने कहा कि सरकार और पुलिस विभाग मामले को दबाने का प्रयास कर रही है, जो कांग्रेस होने  नहीं देगी। नरेश चौहान ने कहा कि यदि सी.बी.आई. नहीं आ रही है तो सरकार उच्च न्यायालय के सिटिंग जज से पूरे केस की छानबीन करवाए। उन्होंने कहा कि बीते दिन डीजीपी ने पत्रकार वार्ता के माध्यम से ऐसा संदेश देने का प्रयास किया कि पूरा मामला सुलझा दिया गया है जबकि इस मामले में अधिकतर गिर तारियां पेपर खरीदने वालों की हुई है। उन्होंने कहा कि किसी के इशारे पर पुलिस को ही पेपर बिक गया,  उसके बारे में कोई कुछ नहीं कह रहा है। केवल  छोटी-छोटी मछलियों का पकडक़र विभाग अपना पीठ थपथपा रहा है जबकि पपेर लीक केस सामने आने से प्रदेश की छवि पूरे देश में धूमिल हुई है। नरेश चौहान ने पूछा कि जब प्रदेश में सरकारी प्रिटिंग प्रैस है तो  पुलिस विभाग को बिहार जाकर पेपर छपवाने की क्या जरु रत पड़ गई।

उन्होंने कहा कि पेपर सैट करने, प्रिंट करवाने और लिखित परीक्षा का जि मा विभागीय अधिकारियों के पास था, ऐसे में किस अधिकारी के स्तर पर चूक हुई, उसे जगजाहिर किया जाना चाहिए।  उन्होंने कहा इस केस में पुलिस अधिकारियों की संलिप्ता से इंकार नहीं किया जा सकता है। नरेश चौहान ने कहा कि मु यमंत्री ने पेपर लीक केस की जांच  सीबीआई से करवाने की कही लेकिन केंद्रीय जांच एजेंसी ने अभी तक केस अपने हाथों में नहीं लिया है। उन्होंने कहा कि ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि सी.बी.आई.और ई.डी. जैसी एजेसियों को केवल केंद्र सरकार अपने राजनैतिक विरोधियों के खिलाफ एक हथियार के तौर पर प्रयोग में ला रही है। इसके साथ् ा ही उन्होंने अग्रिपथ योजना को युवा विरोध करार दिया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार तानाशाही वाला रवैया न अपनाए और देश व सेना हित में ठेकेदारी वाली योजना का रद्द करे। 

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