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शिमला इंटरनेशनल लिटरेचर फेस्टिवल में पहुंचे गुलजार, बोले- अब सिनेमा के साहित्य पर भी चर्चा हो

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में आयोजित किए जा रहे इंटरनेशनल लिटरेचर फेस्टिवल के पहले दिन एक सत्र में साहित्य और सिनेमा पर चर्चा आयोजित की गई. इस सत्र को प्रसिद्ध गीतकार, लेखक गुलजार ने चेयर किया. इस दौरान गुलजार ने कहा कि अब भारतीय सिनेमा का अपना साहित्य भी है, अब समय आ गया है कि फिल्मों का अपना साहित्य हो. इस चर्चा में साहित्य और सिनेमा जगत के प्रसिद्ध चेहरे विशाल भारद्वाज, गौतम घोष, रत्नोत्मा घोष और अतुल तिवारी ने हिस्सा लिया.

गुलजार ने कहा, “साहित्य का 2 हजार साल से ज्यादा का इतिहास है और भारतीय सिनेमा का बमुश्किल 100 साल लेकिन आज के हिसाब से जिस गति से बदलाव हो रहा है उस हिसाब से भारतीय सिनेमा में भी बदलाव हो रहा है. भारतीय सिनेमा अब केवल साहित्य पर ही निर्भर नहीं है, इसके कई आयाम है. उन्होंने कहा कि वर्तमान पीढ़ी और परिदृश्य को देखते हुए बदलाव जरूरी है और समय आ गया है कि सिनेमा का अपना साहित्य हो.”

गुलजार, शिमला इंटरनेशनल लिटरेचर फेस्टिवल, शिमला न्यूज़लिट फेस्ट में पहुंचे गुलजार ने कहा कि अब भारतीय सिनेमा का अपना साहित्य भी है.
देवदास को देखकर कहना मुश्किल है कि ये किसका साहित्य: गुलजार
गुलजार ने कहा कि ‘देवदास फिल्म को देखें तो ये कई निर्देशकों ने बनाई है, देवदास की अलग-अलग कहानियां हैं, विभिन्न भाषाओं और हिंदी में बनी देवदास को देखकर ये कहना मुश्किल है कि ये किसका साहित्य है. इसलिए निर्देशक जो बनाता है, जो फिल्म चलाता है, उसे साहित्य बताना बहुत जरूरी है.

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