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अफगानिस्तान में सिख समुदाय का नरसंहार

18 जून 2022 को काबुल अफगानिस्तान में घटनाओं के दुखद मोड़ पर इंडियन फेडरेशन ऑफ यूनाइटेड नेशन्स एसोसिएशन (IFUNA) ने प्रकट की हैरानी व निराशा । ऐतिहासिक करता परवान गुरुद्वारा पर हमला करने और उसे गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त करने वाले इस्लामिक आतंकवादियों की बर्बर कार्रवाई उनकी कट्टरता और अज्ञानता को दर्शाती है। सिख धर्म शांति, भाईचारे और व्यापक समुदाय की सेवा का धर्म है। सिख अफगानिस्तान में सदियों से शांति से रहे हैं और धर्म के नाम पर हिंसा और रक्तपात इस्लाम की अशांतिपूर्ण शिक्षाओं का अपमान करता है।

चार घंटे बंदूकों से हमले और 20 से अधिक बमों के विस्फोट ने गुरुद्वारा को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया और तीन लोगों की मौत हो गई जिनमें एक पाठी , एक सुरक्षा गार्ड और तालिबान बलों का सदस्य। हम इस जघन्य हमले के पीड़ितों के प्रति अपनी गहरी संवेदना प्रकट करते हैं। किसी समय 70,000 से अधिक के फलते-फूलते अफगान सिख समुदाय को अब केवल 161 तक ही सीमित कर दिया गया है।

इंडियन फेडरेशन ऑफ यूनाइटेड नेशन्स एसोसिएशन (IFUNA) काबुल में तालिबान सरकार से अफगानिस्तान में शेष सिखों और अन्य अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और हमारे ऐतिहासिक गुरुद्वारों की रक्षा करने की अपील करता है, जिनका सिख जगत के लिए गहरा आध्यात्मिक महत्व है। हम पश्चिमी सरकारों से भी अपील करते हैं कि वे शेष हिंदुओं और सिखों को काबुल से जल्द से जल्द निकालने में मदद करें और उनके लिए भारत, कनाडा, यूके और यूएसए जैसे अधिक स्थिर देशों में बसने की व्यवस्था करें।

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