बंदरों की समस्या को लेकर शिमला में मंथन , पकड़ने पर अब 1 हजार देगी सरकार

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हिमाचल प्रदेश में बढ़ता बंदरों का आतंक लोगों के बड़ी समस्या बन गया है।खासकर किसानों की खेती को बंदर उजाड़ रहे हैं जबकि शहरी क्षेत्र में बंदर लोगों को शारीरिक नुकसान भी पहुंचा रहे हैं।सरकार बंदरो की समस्या को हल करने में सफल नहीं हो पा रही है लेकिन सरकार ने बंदरों को वर्मिन घोषित किया हुआ है बावजूद इसके लोग बंदरों को मारने से डर रहे हैं। क्योंकि बंदरो को मारने में लोगों की आस्तिक धारणाएं आड़े आ रही हैं।बंदरों की समस्या से कैसे निपटा जाए इसको लेकर शिमला में वाइल्ड लाइफ विभाग द्वारा “वन्य जीव संघर्ष” (मनुष्य-बंदर) विषय पर एक कार्यशाला का आयोजन किया जिसमें नगर निगम शिमला, धर्मशाला और नगर पंचायतों के अधिकारी व पार्षदों ने अपने सुझाव दिए। कार्यशाला में मुख्यातिथि के तौर पर भाग लेने पहुंचे वन मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर ने कहा कि बंदरों की समस्या से निपटने के लिए सामाजिक दायित्वों के नाते सभी लोगों को आगे आना होगा।सरकार ने बंदरो को वर्मिन घोषित किया है लेकिन बंदरों को मारने की संख्या 100 भी नहीं पहुंच पाई है।  वन मंत्री ने बंदर पकड़ने वालो को प्रति बंदर राशि को 500 से 1 हजार करने का ऐलान भी किया जिससे लोग बंदरों को पकड़ने के लिए आगे आये। वन मंत्री ने कहा सभी को समस्या के समाधान के लिये ब्रेंड अम्बेसडर बनना पड़ेगा।वन मंत्री ने कहा कि बंदरों की समस्या से निपटने के लिए विभाग कंपाउंड प्लांटेशन, ग्रीन कवर  और फलदार पौधों को जंगल में लगानेेेे का काम कर रहा है। गौरतलब है कि प्रदेश में बंदरों के कारण हर साल 184 करोड़ का नुकसान कृषि बागवानी को हो रहा है जबकि बंदरों द्वारा मनुष्य को शारीरिक नुकसान पहुंचाने के मामले अलग से है।कार्यशाला में जन प्रतिनिधियों द्वारा सुझाव तो दिए गए लेकिन समस्या से निपटने के लिए कोई ठोस नीति नहीं बन पाई।

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