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सरकाघाट में निर्माण मज़दूर यूनियन ने किया प्रदर्शन

सरकाघाट। सीटू से सबंधित मनरेगा एवं निर्माण मज़दूर यूनियन के बैनर तले सैंकड़ों मज़दूरों ने आज सरकाघाट बस स्टैंड पर स्थित राज्य श्रमिक कल्याण बोर्ड कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया और एसडीएम के माध्य्म से बोर्ड के सचिव व कार्यकारी अधिकारी शिमला और ज़िला श्रम कल्याण अधिकारी मंडी को माँगपत्र भेजे। जिसका नेतृत्व यूनियन के राज्य महासचिव व बोर्ड के सदस्य भूपेंद्र सिंह व दिनेश काकू, करतार सिंह चौहान, रणताज राणा, मिलाप चंदेल, प्रकाश वर्मा, लुद्दर सिंह, मान सिंह इत्यादि ने किया।

प्रदर्शनकारियों को सम्बोधित करते हुए भूपेंद्र सिंह ने कहा कि सुखू सरकार ने मज़दूरों के पांच सौ करोड़ के लाभ गैर कानूनी तौर पर रोक रखे हैं और मनरेगा मज़दूरों को राज्य श्रमिक कल्याण बोर्ड से बाहर कर दिया है और उन्हें जो सहायता मिलती थी वो भी रोक दी है। लेक़िन अब मज़दूरों से कई तरह के दस्तावेज जमा करने को कहा जा रहा है जिससे उन पर और आर्थिक बोझ पड़ रहा है और समय बर्बाद हो रहा है जबकि ये सभी दस्तावेज पहले भी दिए गए हैं। जिसके विरोध में मज़दूर पिछले कई महीनों से मांग कर रहे हैं लेकिन सुक्खू सरकार अपना मज़दूर विरोधी फैसला वापिस नहीं ले रही है। जिसके कारण आज प्रदेश व्यापी विरोध किए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में बनी कांग्रेस पार्टी की सरकार ने आते ही सबसे पहले मनरेगा मज़दूरों को राज्य श्रमिक कल्याण बोर्ड से बाहर करने का फ़ैसला गत 12 दिसंबर को लिया है। जिससे साढ़े चार लाख मज़दूरों के पिछले तीन साल के पांच सौ करोड़ रुपये के लाभ रोक दिए हैं। हालांकि, इन्हें जारी करने के लिए बोर्ड की पिछली दो बैठकों में निर्णय होने के बाद भी इन्हें जारी नहीं किया जा रहा है। बोर्ड में मजदूरों का पंजीकरण और नवीनीकरण तथा सहायता संबंधी आवेदन पत्र भी जमा नहीं हो रहे हैं।

भूपेंद्र सिंह ने बताया कि सरकार के इस फ़ैसले के कारण मज़दूरों के बच्चों को मिलने वाली छात्रवृति, विवाह शादी, चिकित्सा, पेंशन के अलावा मृत्यु होने पर मिलने वाली सहायता भी बंद कर दी है, जो वास्तव में भवन एवं अन्य निर्माण कामगार क़ानून 1996 की उलंघन्ना है। भूपेंद्र सिंह ने बताया कि अगले सप्ताह होने वाली बोर्ड की बैठक तक भी लंबित लाभ जारी करने तथा रुका हुआ काम बहाल करने बारे फ़ैसला नहीं किया जाता है तो सभी मज़दूर यूनियनें इसके लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर करेगी। इसलिए उन्होंने प्रदेश में बनी तथा कथित व्यवस्था परिवर्तन वाली सरकार को मज़दूरों के छीने हक बहाल करके व्यवस्था सुधारने की मांग की है अन्यथा मज़दूर उन्हें लोकसभा चुनावों में सबक सिखाने के लिए अभियान शुरू कर देंगे।

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