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अपनी मांगों को लेकर किसानों ने किया प्रदर्शन, मुख्यमंत्री के नाम सीटीएम को सौंपा ज्ञापन

सिरसा। किसान भारतीय किसान एकता, बीकेई (BKU) के नेतृत्व में जिलेभर के किसानों ने अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। सबसे पहले किसानों ने लखीमपुर खीरी में शहीद हुए किसानों व पत्रकार को श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए मौन रखकर श्रद्धांजलि दी। इसके अलावा डा. स्वामीनाथन को भी श्रद्धांजलि दी। लखविंदर सिंह औलख ने कहा कि किसानी आंदोलन में शहीद हुए सभी किसान शहीदों की कुर्बानी सदा याद रखी जाएगी। सभी किसान सुबह 10 बजे शहीद भगत सिंह स्टेडियम बरनाला रोड सिरसा में एकत्रित हुए और वहां से प्रदर्शन करते हुए लघु सचिवालय सिरसा पहुंचकर मुख्यमंत्री के नाम उपायुक्त सिरसा को मांग पत्र सौंपा।

लखविंद्र सिंह औलख ने कहा कि हरियाणा सरकार किसानों के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है। सभी विभाग किसानों को प्रताड़ित कर रहे हैं। रबी 2022-23 में ओलावृष्टि से सिरसा जिले के कई गांवों की गेहूं, जौ, सरसों सहित कई फसलें प्रभावित हुई थी, उनका भी अभी तक बीमा क्लेम जारी नहीं किया गया है। हरियाणा सरकार किसानों से पोर्टल-पोर्टल खेल रही है। मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल 28, 29, 30 सितंबर तीन दिन के लिए खोला गया था, लेकिन पोर्टल में दिक्कत होने की वजह से कोई भी किसान अपनी फसल रजिस्ट्रेशन नहीं करवा पाया। नरमे की फसल गुलाबी सुंडी से बर्बाद हो चुकी है, जिसके चलते किसानों ने अपनी फसल का नुकसान क्षतिपूर्ति पोर्टल पर दर्ज करवाना था, लेकिन मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन न होने की वजह से वह भी दर्ज नहीं हो पाएगा। अनाज मंडियों में किसानों की फसल खरीदते समय कटौती के नाम पर लूट हो रही है। प्रशासन कुंभकर्णी नींद सो रहा है।

एमआई काडा विभाग ने पानी की डिग्गियों की पेमेंट लंबे समय से रोक रखी है। सोलर सिस्टम के लिए 2 सालों से किसानों ने पैसे भर रखे हैं, उसका भी अभी कोई अता-पता नहीं है। बिजली विभाग ट्यूबवैलों की सिक्योरिटी बढ़ाकर मीटर के नाम पर किसानों से 8500 लूटने का काम कर रहा है। बीमा कंपनी व बैंक बीमा क्लेम देने की बजाय बीमा प्रीमियम वापस कर रहे हैं। औलख ने बताया कि भारत में वर्ष 2007 में बीटी कॉटन के ट्रायल लगाये गये थे, जोकि 2008-09 में किसानों को बीटी बीज बिजाई के लिए दिया गया था, 16 वर्ष बीत जाने के बावजूद भी बीटी कॉटन का सुधार नहीं किया गया है। इस बीज पर गुलाबी सुण्डी, सफेद मक्खी, जूं, हरातेला सहित कई तरह के कीटों उत्पन्न हो रहे हैं, जिन्हें रोकने में सरकार विफल रही है।

बीटी कॉटन बीज में सुधार करके किसानों को मुहैया करवाया जाए। कीड़ेमार दवाई की कम्पनियों का माफिया किसानों को लूटने का कार्य कर रहा है। बहुत सारी विदेशी कम्पनियां मनचाहे रेटों पर अपने उत्पाद बेच रही है, फिर भी उनका कोई फसलों पर रिजल्ट नहीं आ रहा है। किसानों की फसलें कीटों और बिमारियों से खराब हो रही है। इसलिए पैस्टेसाईड कम्पनियों पर भी लगाम लगाई जाये। कई कम्पनियां निम्न स्तर के उत्पाद पैक करके किसानों को लूट रही है, ये कम्पनियां जिस नाम से उत्पाद का रजिस्ट्रेशन करवाती है वह ना देकर उसी पैकिंग में दूसरा निम्न क्वाटिली व अन्य उत्पाद डाल कर बाजार में बेच रही है। इस पर तुरन्त प्रभाव से अंकुश लगाया जाए। पैस्टीसाईड एक्ट में तब्दीली करके उत्पाद के तीन की जगह 4 सैम्पल विभाग द्वारा लिये जाये, जिसमें से एक सैम्पल शिकायकर्ता किसान को दिया जाए।

किसान अपना सैम्पल सरकार द्वारा मंजूरशुदा पैस्टीसाईडज, फर्टीलाईजर व बायोफर्टीलाईजर लेब में चैक करवा सके और निम्न क्वाटिली पाये जाने पर उस कम्पनी पर कानूनी कार्यवाही व किसानों को मुआवजा दिलवाने का प्रावधान हो। किसानों की रबी की फसल का बिजाई का समय चल रहा है, जिसके लिए डीएपी व यूरिया खाद की जरूरत है, लेकिन फर्टीलाईजर विक्रेता किसानों को डीएपी व यूरिया खाद के साथ अनावश्यक निम्न स्तर के प्रोडेक्ट टेगिंग करके देते हैं, इसलिए डीएपी व यूरिया सहित सभी उत्पादों का रोजाना विवरण लिखें। इसके अलावा बीमा कंपनियों द्वारा किसानों के खातों से बीमा राशि तो काट ली जाती है, लेकिन जब मुआवजा देने की बात आती है तो कंपनी अपने हाथ पीछे खींच लेती है। इसलिए बीमा कंपनियों को सख्त हिदायत दी जाए कि वो समय पर क्लेम की अदायगी करे।

इस मौके पर ऐलनाबाद प्रधान प्रकाश ममेरां, बीकेई प्रदेश महासचिव अंग्रेज सिंह कोटली, विनोद जांदू, महावीर गोदारा, ओढ़ा ब्लॉक प्रधान भरत सिंह गोदारा, अंग्रेज सिंह कोटली, गुरलाल भंगू, गुरजीत मान, नथा सिंह झोरङ रोही, निक्का सिंह फग्गू, महेन्दर सिंह ढाणी रघुआना, राजू रघुआना ढाणी, सीरा फग्गू, भिन्दा काहलों, लीला सिंह साहुवाला, सुखा दंदिवाल, सुनील नैन खारियां, ओम प्रकाश डिंगमंडी, विनोद जांदु, मान सिंह गुडियाखेड़ा, गुरदेव सिंह रोहिड़ावाली, भोला सिंह रोड़ी, महावीर गुडियाखेड़ा, हनुमान न्योल, सूबा सिंह नेजाडेला, वरिंदर सिंह कसनखेड़ा, सतनाम सिंह, दीपू पंजुआना, बापू हरचरण सिंह, कुल्तार कंवर सहित काफी संख्या में किसान उपस्थित थे।

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