भाजपा-जजपा सरकार में हुए शराब घोटाले, रजिस्ट्री घोटाले व चावल घोटाले में करोड़ों रुपयों की लूट : कांग्रेस

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कैथल,13 अगस्त 2020 | हरियाणा में जहां एक और भयावह कोरोना महामारी से लड़ाई लड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर घोटालों को अंजाम देकर खुलेआम लूट की गई है। कोरोना महामारी के लॉकडाउन के बीच हरियाणा में कई घोटालों को अंजाम दिया गया है। हरियाणा में भाजपा-जजपा सरकार में हुए शराब घोटाले, रजिस्ट्री घोटाले और चावल घोटाले में करोड़ों रुपयों की लूट की गई। इसको लेकर कैथल के लघु सचिवालय में आज पूर्व मंत्री जयप्रकाश, वरिष्ठ कांग्रेस नेता सुदीप सुरजेवाला, पूर्व संसदीय सचिव दिल्लूराम बाजीगर, पूर्व मंत्री सुल्तान जडौला व पुंडरी से कांग्रेस प्रत्याशी सतबीर भाणा ने धरना दिया व राष्ट्रपति के नाम तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा।

उन्होंने कहा कि बीते चार महीनों में कोरोना महामारी और लॉकडाउन के बीच हरियाणा में हुए घोटालों से जुड़े निम्नलिखित तथ्य आपके ध्यान में ला रहे हैं

  1. हरियाणा में कोरोना महामारी को देखते हुए लगाए गए लॉकडाउन के बीच शराब घोटाले में सैंकड़ों-हजारों करोड़ की शराब बिक्री व तस्करी की परतें लगातार खुल रही हैं। इस घोटाले में शराब माफिया के तार सीधे-सीधे उच्च पदों पर बैठे राजनीतिज्ञों तथा आला अधिकारियों से जुड़े हैं। शराब घोटाला उजागर होने के बाद इसे दबाने की ही साजिश थी कि मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल खट्टर जी ने ‘स्पेशल इनवेस्टिगेशन टीम’ (SIT) की जांच को सिरे से खारिज कर इसकी जगह SET यानि स्पेशल इंक्वायरी टीम का गठन कर दिया था। जिसके पास इस घोटाले की तह तक जाने की शक्तियां ही नहीं थी। बेहद ही सीमित अधिकारों में हुई SET की जांच में सफेदपोशों तथा अफसरशाही की शराब ठेकेदारों व शराब माफिया से संलिप्तता का षडयंत्र खुले तौर से सामने आया है। इसके बाद भी प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ने SET की रिपोर्ट को ही सिरे से खारिज कर दिया और मुख्यमंत्री ने उपमुख्यमंत्री की बात से किनारा कर उनके दावे को खारिज कर दिया। इससे साफ प्रतीत होता है कि दाल में कुछ काला नहीं पूरी दाल ही काली है। सरकार द्वारा लगातार इस घोटाले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। यदि इस घोटाले की निष्पक्ष तरीके से जांच होती है तो इसमें कई और लोगों की संलिप्तता और घोटाले की पूरी सच्चाई सामने आ सकेगी।
  2. हरियाणा में अवैध तरीके से रजिस्ट्रियों का खेल कोरोना महामारी में जमकर खेला गया। रजिस्ट्रियां करते समय न तो नियमों का ध्यान रखा गया और न ही जिला नगर योजनाकारों (डीटीपी) से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लिए गए। हरियाणा के 30 से ज्यादा शहरी निकायों के कंट्रोल एरिया में हुई रजिस्ट्रियों में गड़बिडय़ां पाई गई हैं। इन रजिस्ट्रियों में करोड़ों रुपयों के घोटाले को अंजाम दिया गया। आरोप लगाया जाता है कि यह पैसा बड़े सफेदपोशों के साथ-साथ विभाग के उच्च अधिकारियों में भी बांटा गया है। परंतु शराब घोटाले की ही तरह रजिस्ट्री घोटाले को भी दबाने के प्रयास हरियाणा सरकार द्वारा किए जा रहे हैं।
  3. हरियाणा प्रदेश में शराब और रजिस्ट्री घोटाले के अलावा चावल घोटाले को भी अंजाम दिया गया। सरकार राइस मिलरों को कांट्रेक्ट के तहत धान उपलब्ध कराती है। मिलरों को इसका चावल निकालकर सरकार को देना होता है। यह कुल धान का करीब 67 फीसद होता है। लेकिन सरकार को कम मात्रा में चावल जमा करवाया गया और बड़ा गोलमाल कर घोटाला किया गया। लॉकडाउन के दौरान चावल महंगे दामों में मार्केट में बेचे गए। यह घोटाला अनुमानित 100 करोड़ से अधिक का है। यदि निष्पक्ष तरीके से जांच होगी तो यह घोटाला और भी बड़ा साबित हो सकता है।
  4. इनके अलावा भी बीते 6 वर्षों के दौरान इस सरकार में कई घोटाले हुए हैं। इन घोटालों में धान खरीद घोटाला, अरावली भूमि उपयोग घोटाला, खनन घोटाला, रोडवेज किलोमीटर योजना घोटाला, एचएसएससी भर्ती घोटाला, एससी छात्रवृत्ति योजना घोटाला, बिजली मीटर घोटाला शामिल हैं। इनके साथ ही इस सरकार में हुए घोटालों की लंबी सूची है।

खट्टर सरकार से अनुरोध करते हुए उन्होंने कहा कि इन घोटालों की सच्चाई जनता के सामने आना और गुनहगारों को सजा मिलना बेहद ही आवश्यक है। इन घोटालों की सच्चाई निष्पक्ष जांच से ही सामने आ सकती है। हमारी मांग है कि इन घोटालों की जांच हाईकोर्ट के सीटिंग जज से करवाई जाए। जिससे इन घोटालों में दूध का दूध और पानी का पानी हो सके एवं दोषियों को सजा मिल सके।

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