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विकास पथ पर आगे बढ़ रहा है हरियाणा 

(राकेश कथूरिया)

भाजपा प्रवक्ता प्रवीण आत्रेय ने प्रदेश सरकार द्वारा किए जा रहे विकास कार्यों की चर्चा करते हुए कहा कि प्रदेशवासियों की आशा एवं आंकक्षाओं के अनुरूप कार्य करते हुए राज्य सरकार ने शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वाभिमान, सुरक्षा और सुशासन के माध्यम से प्रदेश के चहुंमुखी विकास को नए गति प्रदान की।

प्रवीण आत्रेय ने कहा कि देश की आजादी के अमृत महोत्सव वर्ष में वर्तमान राज्य सरकार ने क्षेत्रवाद और भाई-भतीजावाद की संकीर्णता से ऊपर उठकर प्रदेश के सन्तुलित, सतत और समान विकास का मार्ग प्रशस्त किया है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल के नेतृत्व में राज्य सरकार ने सुशासन अभियान के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग करते हुए ई-गवर्नेंस का रास्ता अपनाया जिससे भ्रष्टाचार पर अंकुश लगा और प्रदेश के कमजोर, गरीब व आम आदमी को भी योजनाओं का लाभ मिल रहा हैं। 

प्रवीण आत्रेय ने कहा कि कोई भी विभाग अथवा क्षेत्र ऐसा नहीं बचा, जिसमें सुशासन की पहल न की गई हो। इस नई व्यवस्था में कोई भी नागरिक सरलता से अपना हक प्राप्त कर सकता है। राज्य सरकार ने ‘सुशासन से सेवा’ के संकल्प के साथ पंडित दीनदयाल उपाध्याय के अंत्योदय दर्शन के अनुरूप ‘सबका साथ-सबका विकास, सबका विश्वास-सबका प्रयास’ और ‘हरियाणा एक-हरियाणवी एक’ के मूलमंत्र पर चलते हुए प्रदेश के चहुँमुखी विकास के लिए काम किया है। 

प्रवीण आत्रेय ने कहा कि सरकार बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर के सिद्धान्त की पालना करते हुए क्षेत्रवाद और भाई-भतीजावाद से ऊपर उठकर हर क्षेत्र व हर वर्ग का समान विकास कर रही है। नीति आयोग के एसडीजी इंडिया इंडेक्स 2020-21 में हरियाणा देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हुआ । पंक्ति में खड़े अन्तिम व्यक्ति का जीवन-स्तर ऊपर उठाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने ‘मुख्यमंत्री अंत्योदय परिवार उत्थान योजना’ शुरू की है। गांवों को ‘लाल डोरा मुक्त’ करने की हरियाणा की योजना को केन्द्र सरकार ने ‘स्वामित्व योजना’ के रूप में पूरे देश में लागू किया है। ‘मेरा पानी-मेरी विरासत’ योजना का अध्ययन करने के लिए भी एक केन्द्रीय टीम ने प्रदेश का दौरा किया था।

प्रवीण आत्रेय ने कहा कि ‘‘शासन कम, सुशासन ज्यादा’’ को सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने कृषि, उद्योग, स्वास्थ्य, शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा आदि हर क्षेत्र में ई-गवर्नेंस की पहल की हैं। ई-गवर्नेंस का यह अभियान अब परिवार पहचान पत्र तक पहुंच चुका है। इस एकमात्र दस्तावेज से लोगों को सभी सरकारी सेवाओं और योजनाओं का लाभ घर बैठे ही मिलने लगा है। उन्हें दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ते। अब जन्म-मृत्यु का डेटा भी ऑटो अपडेट हो गया है। सरकार द्वारा दी जाने वाली पाई-पाई सही लाभार्थी तक पहुंचाने और फर्जीवाड़े पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, सब्सिडी और वित्तीय सहायता के लिए ‘डी.बी.टी.’ सुविधा शुरू की गई । इसके अतिरिक्त, जनता के प्रति प्रशासन की जबाबदेही तय करने और समय पर सर्विस डिलीवरी सुनिश्चित करने के लिए ‘ऑटो अपील सॉफ्टवेयर’ (आस) शुरू किया गया और इससे 570 सेवाओं को जोड़ा गया । आवेदक को यदि निर्धारित समय में सेवा नहीं मिलती है तो उसकी अपील उच्चाधिकारी को और फिर ‘सेवा का अधिकार आयोग‘ को चली जाती है। इसके अतिरिक्त, पारदर्शिता एवं स्थायित्त्व बढ़ाने के लिए ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी लागू की जा चुकी है।

प्रवीण आत्रेय ने कहा कि वर्ष 2020 में हम कोविड-19 महामारी से जूझ रहे थे। इस वैश्विक महामारी ने प्रत्येक व्यक्ति को कहीं न कहीं प्रभावित किया था। राज्य सरकार ने महामारी से बचाव, राहत व ईलाज के पर्याप्त प्रबंध किए। उन्होंने कहा कि सरकार और इसका पूरा तंत्र, विशेषकर चिकित्सकों व स्वास्थ्य कार्यकर्त्ताओं और अन्य अग्रिम पंक्ति के कोविड योद्धाओं के अथक प्रयासों के फलस्वरूप हम इस महामारी पर नियंत्रण पाने में सफल रहे । हरियाणा विकास के लक्ष्यों और उद्देश्यों को प्राप्त करने में सफल रहा है।

अब किसानों को उनकी फसलों का करोडों रुपए का भुगतान सीधा खाते में 

डीबीटी के माध्यम से होता है। एम.एस.पी. पर 14 फसलों की खरीद करने वाला हरियाणा देश का एकमात्र राज्य बना। ‘मुख्यमंत्री बागवानी बीमा योजना’ तथा 

किसान क्रेडिट कार्ड की तर्ज पर ’पशुधन किसान क्रेडिट कार्ड योजना’ शुरू की गई।

राज्य सरकार प्रदेश में कृषि सुधार और किसानों के उत्थान के लिए अहम निर्णय लेते हुए किसानों की फसलों की ‘एम.एस.पी’ पर खरीद करने के साथ-साथ प्राकृतिक आपदा से फसल नुकसान की समय पर भरपाई सुनिश्चित करती है। इस प्रकार राज्य सरकार ‘बीज से बाजार तक’ हर कदम पर किसान के साथ खड़ी है।

 प्राकृतिक आपदा से खराब फसलों के लिए मुआवजा राशि 12,000 रुपये से बढ़ाकर 15 हजार रुपये प्रति एकड़ किया गया । बाजरे के लिए भी भावांतर भरपाई योजना शुरू की गई। 

प्रवीण आत्रेय ने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए फसल विविधिकरण और बागवानी को बढ़ावा दे कर किसानों को लाभ पहुंचाया गया। हरियाणा पहला राज्य है जिसने बागवानी फसलों को मौसम की मार से बचाने के लिए ‘मुख्यमंत्री बागवानी बीमा योजना’ शुरू की । इसके अतिरिक्त, बागवानी को बढ़ावा देने के लिए भिवानी, नूंह और झज्जर में तीन नए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए । वर्ष 2021-22 के दौरान बागवानी क्षेत्र में वर्टिकल फार्मिंग की एक अनूठी प्रौद्योगिकी लागू की गई और इस खेती में निवेश पर 65 प्रतिशत सब्सिडी दी जा रही है। मशरूम की खेती के लिए सामान्य किसानों को 40 प्रतिशत और अनुसूचित जाति के किसानों को 90 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है।

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