अदालती आदेशों की जांच परख करने पर हाईकोर्ट ने दर्ज की टिप्पणी

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अदालती आदेशों की जांच परख करने पर हाईकोर्ट ने टिप्पणी दर्ज की है। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश चंद्र भूसन बारोवालिया की खंडपीठ ने निर्णय में कहा कि राज्य सरकार के उस दोषी अधिकारी के खिलाफ  हमें अवमानना याचिका दायर करने में कोई हिचकिचाहट नहीं है। जिसने अदालती निर्णय को परखने की कोशिश की है, लेकिन उक्त अधिकारी सेवानिवृत्त हो चुका है इसलिए उसे माफ  किया जाता है। मामले के अनुसार राज्य सरकार ने प्रशासनिक ट्रिब्यूनल के उस निर्णय को हाईकोर्ट के समक्ष चुनौती दी।जिसमें प्रतिवादी पीसी शर्मा की याचिका को ट्रिब्यूनल ने स्वीकार कर दिया था और प्रतिवादी की सर्विस रिकॉर्ड में जन्मतिथि ठीक किए जाने के आदेश दिए गए थे। अदालत ने पाया कि प्रतिवादी पीसी शर्मा ने हाईकोर्ट के समक्ष भी इसी तरह की याचिका दायर की थी जिसमें हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिए थे कि पीसी शर्मा के प्रतिवेदन पर निर्णय लिया जाए लेकिन राज्य सरकार के अधिकारी ने पीसी शर्मा के प्रतिवेदन को यह कहकर खारिज कर दिया कि सर्विस रिकॉर्ड में जन्मतिथि सिर्फ  पांच वर्ष के भीतर ही ठीक कर सकते हैं।

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