10 हजार जवानों पर भारी पड़ रही है यंग ट्रिपल ब्रिगेड

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Hong Kong को लेकर चीन बेहद आक्रामक मुद्रा में आ चुका है। यहां पर पिछले  तीन माह से जारी प्रदर्शनों को दबाने के लिए अब चीन ने किसी भी हद तक जाने का मन बना लिया है। इसको लेकर अमेरिका भी काफी चिंतित है। यहां के खराब होते हालातों को देखते हुए अमेरिका पहले ही अपना डर सामने ला चुका है। दरअसल, अमेरिका को डर है कि कहीं चीन इसको भी थियानमेन चौक पर हुए बहुचर्चित विरोध प्रदर्शनों की तरह न दबा दे। वहीं जिस तरह से थियानमेन चौक पर पीएलए के जवानों और टैंकों की तैनाती सरकार ने की थी अब वही सब कुछ हांगकांग में भी दिखाई दे रहा है। उसका यह डर यूं ही नहीं है। असल में थियानमेन चौक पर पूर्व में हुए विरोध प्रदर्शनों के पीछे भी युवाओं की ही ताकत थी। ऐसा ही इस बार भी है। यही वजह है कि चीन की सरकार की आंखों में हांगकांग के विरोध प्रदर्शनों की ताकत बने युवा खटक रहे हैं। इतना ही नहीं हांगकांग के प्रदर्शनों की अगुवाई कर रहे तीन युवा काफी समय से चीन की सरकार के निशाने पर हैं। आलम ये है कि ये युवा चीनी सेना के दस हजार जवानों पर भारी पड़ रहे हैं।  इन प्रदर्शनों के पीछे जो संगठन है उसका नाम डेमोसिस्‍टो है। इसके पीछे जो तीन युवा है उनका नाम जोशुआ वांग, एग्निस चो और नाथन लॉ हैं। इनका ये संगठन हांगकांग में लोकतंत्र का समर्थन करता आया है। इनमें जोशुआ 22 वर्ष के तो नाथन 26 वर्ष के हैं। जोशुआ की ही बात करें तो 2014 में वह उस वक्‍त मीडिया की सुर्खियां बने थे जब लोकतंत्र की मांग पर हांगकांग में विरोध प्रदर्शन हुए थे। मताधिकार की मांग को लेकर 2014 में 79 दिनों तक आंदोलन चला था, लेकिन चीन ने सख्ती के साथ उसे दबा दिया था। उनके द्वारा चलाए गए अंब्रेला मूवमेंट में हजारों लोगों ने हिस्‍सा लिया था। इस युवा ब्रिगेड की बढ़ती ताकत से घबराए चीन ने इन्‍हें 2017 में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। इस दौरान जोशुआ को तीन माह से अधिक तक जेल में रहना पड़ा था। 2018 में जोशुआ का नाम नोबेल शांति पुरस्‍कार के लिए नामित किया गया था।

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