1 जनवरी से पहले नहीं बनी बात तो किसान करेंगे बड़े फैसले का ऐलान 1 जनवरी को किसानों की महा बैठक

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सोनीपत : दिल्ली हरियाणा की सीमा आंदोलनरत किसान संगठनों ने नए साल पर दिल्ली की सीमाओं पर अपनी संख्या और बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है इसके लिए हरियाणा पंजाब और अन्य राज्यों में मौजूद किसान संगठनों के सदस्यों को निर्देश दिए जा चुके हैं कि वे अपने अपने इलाकों से ज्यादा से ज्यादा संख्या में किसानों को आंदोलन से जोड़े भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष गुरनाम सिंह ने कहा कि नए साल पर कुंडली बॉर्डर पर एक बैठक का आयोजन किया गया है जिसमें आगामी रणनीति तैयार की जाएगी

अपनी मांगों को लेकर सिंघु बॉर्डर पर कितना डटे किसानों ने नए साल पर एक बड़ी बैठक का ऐलान किया है किसान संगठनों और सरकार के बीच 1 जनवरी से पहले शादी दौर की बैठक होगी केंद्र सरकार में उम्मीद है कि इस बैठक में बीच का रास्ता निकल जाएगा लेकिन अगर ऐसा नहीं होता तो किसान अपने आंदोलन को और तेज करने की रणनीति बनाएंगे भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष गुरनाम सिंह चन्नी ने कहा कि आंदोलन से किसानों को अधिक से अधिक जोड़ा जाएगा किसानों की मांग नहीं माने जाने पर आंदोलन को जन जन तक पहुंचाया जाएगा इसके लिए भारतीय किसान यूनियन हरियाणा की ओर से 1 जनवरी को धरना स्थल पर बैठक बुलाई गई है गुरनाम सिंह ने बताया कि हरियाणा पंडाल में इस बैठक का आयोजन किया गया है और प्रदेश भर के सदस्यों से बैठक में पहुंचने का आह्वान किया गया है

इतना ही नहीं आंदोलन जन-जन तक पहुंचे इसके लिए किसानों से आह्वान किया गया है कि वह अपने घरों पर भारतीय किसान यूनियन का झंडा लगाएं इसके लिए जल्द ही भारतीय किसान यूनियन झंडे का प्रारूप जारी करेगी देश भर में एक ही तरह के झंडे के नीचे किसान आंदोलन चलाएंगे उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि किसान अपने ट्रैक्टर गाड़ियां बाइक पर भी यह झंडा लगाएं ताकि सरकार को पता चले कि किसान हर जगह कानून के विरोध में खड़ा है

बहरहाल सरकार के साथ के दौर की वार्ता को किसान नकार चुके हैं ऐसे में अब निगाहे सातवें दौर की वार्ता पर है अगर सातवें दौर की वार्ता में कोई सकारात्मक परिणाम सामने नहीं आता तो किसानों ने पहले ही आंदोलन को तेज करने की रणनीति भी बना ली है ऐसे में कहीं ना कहीं आगे आने वाले दिनों में आंदोलन की रफ्तार को और तेज किया जाएगा तो वही भारतीय किसान यूनियन गांव-गांव जाकर किसानों को इन कानूनों की कमी बताएंगे और आढ़तियों से भी सहयोग लेकर मंडियों में आने वाले हर किसान को कानून के बारे में समझाया जाएगा और देशभर में इस आंदोलन को चलाया जाएगा

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