जल्द ही नहरों में पानी नहीं आया तो फसल सूखने से करोंड़ों रूपये का होगा नुकसान

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किसानों की हितैशी होने का दावा करने वाली भाजपा और जजपा सरकार में मेवात के किसानों को समय पर प्रयाप्त नहरी पानी नसीब नहीं हो रहा है। ज्यों-ज्यों नहरी पानी आने में देरी हो रही है किसानों की चिंता बढ़ती जा रही है। किसानों ने सुखी नहर में उतरकर अपना विरोध जताया व नारेबाजी की। किसानों ने करीब एक महिना पहले अपनी गेंहू, सरसों आदि सफल की बिजाई तो कर दी लेकिन भूड़ बुझाने यानि पहला पानी देने के लिए नहरी पानी नहीं आ रहा है। क्योकि गेंहू की फसल में करीब 5/6 बार पानी की सिंचाई करनी पड़ती है तब कही फसल पकती है। किसानों ने लाखों रूपये की लागत से फसलों की बिजाई तो कर दी अगर जल्द ही नहरों में पानी नहीं छोड़ा गया तो फसल पूरी तरह बर्बाद हो जाएगी। किसानों का कहना है सरकार क्या तब पानी छोडेगी तब फसल सूख जाएगी?
किसानों का कहना है उजीना ड्रेन से पुन्हाना खण्ड के बादली, पापड़ा, पिपरौली, लुहिगां कलां, मामलिका सहित ज़िले के 100 से अधिक गांवों के हजारों एकड़ खेती की सिंचाई की जाती है। उनका कहना है कि फसल की बिजाई के वक्त बड़ी जद्दोजहद के पानी इस नहर में पानी छोड़ा गया था। जिसकी वजह से किसानों ने अपने गेंहू, सरसों आदि फसलों की बिजाई कर ली थी। अब एक महिने से ज्यादा समय गुजर जाने के बाद भी नहर में पानी नहीं आ रहा है। अगर जल्द ही पानी नहीं तो बिन पानी के फसल सूख जाएगी।
किसानों का कहना है कि एक महिना पहले उजीना ड्रेन में आऐ पानी की वजह से हजारों एकड़ खेतों की बिजाई कर दी थी। अब फसल उग आई है। अब सिंचाई के नहरी पानी की सख्त जरूरत है। अधिकारियों से बार बार कहने पर भी नहर में पानी नही छोड़ा जा रहा है। अगर जल्द ही नहरों में पानी नही छोड़ा गया फसल सूखने से किसानों का करोंडों रूपये का नुकसान हो जाएगा।
किसानों का कहना हैं कि भाजपा की पिछली सरकार के समय मेवात में समय≤ पर पानी आता था लेकिन जब से प्रदेश में गठबंधन की सरकार आई है तब से मेवात की नहरों में पानी नहीं आ रहा है। इससे तो यही लगता है कि उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चैटाला मेवात की बजाए अपने ही इलाके को पानी छोड़ रहे है।

क्या कहते हैं अधिकारी

सिंचाई विभाग पुन्हाना के एसडीओ राजेश कुमार का कहना है कि पीछे से पानी ही नहीं आ रहा है। मेवात और राजस्थान के लिए कम से कम 350 क्यूसिक पानी चाहिए। उन्होने कहा पानी के लिए उच्च अधिकारियों के पास डिमांड भेजी हुई है। उन्होने भी माना की फिलहाल फसल के लिए पानी की सख्त जरूरत है।

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