भारतीय किसान यूनियन ने की मांग , उत्पादन कम, आवक है ज्यादा

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धान घोटाले को लेकर प्रदेश सरकार की ओर से बेशक मिलों की फिजिकल वेरिफिकेशन कराई जा रही हो, लेकिन इससे घोटाला सामने आने की संभावनाएं कम हैं। भारतीय किसान यूनियन ने मांग की है कि इस घोटाले को सामने लाना है तो आढ़तियों और किसानों के जे फार्म की जांच की जानी चाहिए। भाकियू का दावा है कि अगर ऐसा किया गया तो घोटाला सामने आएगा, क्योंकि किसानों से नमी के नाम पर खरीद एजेंसियों ने सस्ते दामों पर पीआर धान की खरीद कर रखी है, जबकि आढ़ती ने उसी जे फार्म के माध्यम से सरकार से पूरा रेट ले रखा है। इसी में घोटाला हुआ है। उधर, दूसरे दिन भी 30 टीमों ने अलग अलग क्षेत्रों में राइस मिलों में स्टाक की जांच की। देर रात तक जांच का कार्य चलता रहा। जिले में स्थित 316 राइस मिलों के स्टाक की जांच के लिए 30 टीमों का गठन किया गया है। इसमें अलग अलग विभागों के अधिकारियों को शामिल किया गया है। 26 नवंबर तक इस जांच को पूरा किया जाना है। शुक्रवार को टीमों ने जांच शुरू की थी। शनिवार को 60 राइस मिलों की जांच का टारगेट रखा गया था, देर रात तक अधिकारी मिलों में रखे स्टाक की गिनती करते रहे। करनाल, घरौंडा, निसिंग, तरावड़ी समेत अन्य कस्बों में स्थित मिलों की जांच की गई। हालांकि, अभी तक कोई भी टीम जांच को लेकर मुंह खोलने को तैयार नहीं है। आशंका जताई जा रही है कि जांच में कई बातें सामने आ सकती हैं। दो से तीन मिलों के स्टॉक में गड़बड़ी की आशंकाएं जताई गई हैं। इसको लेकर मिलर्स में हड़कंप की स्थिति बनी हुई है।

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