सड़कों पर घूमने को विवश दिव्यांग बच्चे संग मां

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सुंदरनगर की सड़कों पर चंडीगढ़ मनाली नेशनल हाईवे किनारे बेसहारा महिला अपने दिव्यांग बच्चे के साथ घूमती हुई अकसर नजर आती है। लेकिन सरकार की ओर से बेसहारा और दिव्यांगों के लिए चलाए जा रहे संस्थान वर्तमान में सफेद हाथी साबित हो रहे हैं। ना तो प्रशासन ने इस दिशा में ऐसे बेसहारा लोगों को सहारा देने के लिए रैन बसेरा तक पहुंचाने की व्यवस्था की है और ना ही दिव्यांग बच्चे को संबंधित विशेष बच्चों की स्कूलों में तक पहुंचाने की जहमत उठाई है। कुल मिलाकर यह वर्ग समाज की ओर से सताए हुए लोगों को ऊपर उठाने के लिए सरकार की ओर से किए जा रहे तमाम बड़े.बड़े दावों धरातल में भलिभूत होते नजर नहीं आए हैं। जिसका ताजा उदाहरण उपमंडल सुंदरनगर की चंडीगढ़ मनाली नेशनल हाईवे किनारे बेसहारा महिला और उसके 6 साल के दिव्यांग बच्चे को अकसर सड़क किनारे घूमते फिरते देखकर लगाया जा सकता है। जोकि दिसंबर माह की इस कड़ाके की ठंड में बिना छत के और बिना सहारा के जीवन व्यतीत करने को मजबूर है। इस वाक्य से प्रशासन और पुलिस समेत तमाम सामाजिक संस्थाएं भले ही परिचित है। लेकिन उक्त महिला और दिव्यांग बच्चे को सहारा देने के लिए कोई भी आज दिन तक आगे नहीं आया है। क्षेत्र के मुख्य समाजसेवी एवं दिव्यांगजनों के कानूनी सलाहकार कुशल कुमार सकलानी के ध्यान में जब यह मामला आया और उन्होंने व्यक्तिगत तौर पर सुंदरनगर के बस स्टैंड और नरेश चौक पर उक्त महिला को बच्चे के संग पाया तो उन्होंने इस मामले का त्वरित कड़ा संज्ञान लिया और प्रशासन व संबंधित विभाग के अधिकारियों और पुलिस को सूचित किया। लेकिन कागजी खानापूर्ति के बावजूद भी इस दिशा में कोई भी कार्यवाही शासन और प्रशासन की ओर से अमल में नहीं लाई गई है। पुलिस भी आंख बंद करके बैठी हुई है और प्रशासन भी मात्र दस्तावेजों के पत्राचार के माध्यम से सवाल.जवाब तक ही खाना पूर्ति करता नजर आया है। इस बात को लेकर दिव्यांगों के कानूनी सलाहकार ने शासन और प्रशासन की कार्यप्रणाली के प्रति गहरा खेद व्यक्त किया है।

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