इतने फीसद तक वसूल सकते हैं ब्‍याज – सरकारी साहूकार

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साहूकार शब्द सुनते ही जहन में पुराने समय की क्रूर तस्वीरें उभरने लगती हैं। गरीबों की जमीन और संपत्ति को गिरवी रखकर पहले ब्याज पर पैसा देना, फिर ब्याज की फिरकी में गरीब को उलझाकर उसका सबकुछ हड़प लेने के आरोप साहूकारों पर लगते थे। अब भले ही शहर के लोग साहूकारों के पास न जाते हों, लेकिन कस्बों और गांवों में अभी भी साहूकारों की दुकान अच्छी चलती है। मेरठ जनपद में 415 लोगों को सरकार ने साहूकारी की अनुमति दी है। उन्हें इस बाबत लाइसेंस मिला है, वह भी केवल बीस रुपये में। सरकार साहूकारों पर किस कदर मेहरबान है। इसकी बानगी लाइसेंस की फीस है। कोई भी व्यक्ति साहूकारी का लाइसेंस ले सकता है। फीस मात्र बीस रुपये है। तीन साल के लिए यह लाइसेंस मिलता है, जिसका सालाना शुल्क 15 रुपये है। समय से इसका नवीनीकरण न कराने पर पेनॉल्टी भी मात्र 5 रुपये है। अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व यह लाइसेंस जारी करते हैं। केवल मेरठ जनपद में ही साहूकारी करने वाले लोगों की संख्या कई हजार है। इनमें से 415 लाइसेंसधारी हैं। सरधना तहसील में 150, मवाना में 100 से ज्यादा लाइसेंस हैं।

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