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धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र में 7 से 24 दिसंबर तक मनाया जाएगा अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव- मुख्यमंत्री।

भारतीय संस्कृति की क्रीड़ा स्थली और ‘श्रीमद्भगवद्गीता’ की जन्मस्थली धर्मक्षेत्र-कुरुक्षेत्र की पावन भूमि पर एक बार फिर अध्यात्म, संस्कृति एवं कला का दिव्य संगम देखने को मिलेगा। 7 दिसंबर से 24 दिसंबर तक अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव- 2023 का भव्य आयोजन किया जाएगा, जिसमें श्रीमद्भगवद्गीता का शास्वत संदेश दिया जाएगा। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने मंगलवार को चंडीगढ़ में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि जिस प्रकार भारत के संविधान को शासकीय व्यवस्था की गीता कहा जाता है, उसी प्रकार वे स्वयं मानते हैं कि गीता जीवन के पथ प्रदर्शन के नियमों के नाते से एक संविधान है। उन्होंने कहा कि इस बार अन्तर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव में असम सहयोगी राज्य की भूमिका में रहेगा। पुरुषोत्तमपुरा बाग, ब्रह्म सरोवर पर असम सरकार द्वारा पैवेलियन लगाया जा रहा है जिसमें उसकी संस्कृति, शिल्प, खान-पान इत्यादि से सम्बन्धित स्टाल आकर्षण का केन्द्र रहेंगे।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2014 में कुरुक्षेत्र आगमन के दौरान कहा था कि कुरुक्षेत्र को गीता स्थली के रूप में पहचान दिलाने के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे। प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन के बाद से हरियाणा सरकार द्वारा गीता महोत्सव को कुरुक्षेत्र में अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर वर्ष 2016 से मनाया जा रहा है। विगत 7 वर्षों से इस महोत्सव को अपार सफलता और लोकप्रियता मिल है। वर्ष 2019 में यह महोत्सव देश से बाहर मॉरीशस तथा लन्दन में भी मनाया गया। सितम्बर, 2022 में यह कनाडा में भी आयोजित किया गया। इस साल अप्रैल माह में भी अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव आस्ट्रेलिया में आयोजित किया गया। वर्ष 2024 में अमेरिका में भी इस महोत्सव के आयोजन का निमंत्रण मिला है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 17 दिसंबर से मुख्य कार्यक्रम का आयोजन होगा। हम सबके लिए गौरव का क्षण होगा जब देश के उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ 17 दिसम्बर को ब्रह्म सरोवर पर गीता यज्ञ एवं पूजन से इस महोत्सव का विधिवत शुभारम्भ करेंगे। इसके पश्चात् वे इसी दिन कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में तीन दिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय गीता संगोष्ठी का शुभारम्भ भी करेंगे। यह संगोष्ठी 19 दिसम्बर तक चलेगी। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भगवदगीता की प्रेरणा से विश्व शान्ति और सदभाव विषयक इस संगोष्ठी में देश-विदेश के गीता मर्मज्ञ, विद्वान एवं शोधार्थी अपने शोधपत्र प्रस्तुत करेंगे। निश्चय ही इस संगोष्ठी से गीता के संदेश की महत्ता विश्व में फैलेगी। उन्होंने कहा कि धीरे –धीरे अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव मेला आर्थिक दृष्टि से सेल्फ-फाइनेंस की दिशा में बढ़ रहा है।

उन्होंने कहा कि कुंभ मेले की तर्ज पर अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के लिए अलग से मेला ऑथोरिटी बनाई जाएगी, जो अपने स्तर पर इसका आयोजन करेगी। सरकार की ओर से एक मेला अधिकारी तैनात किया जाएगा, जो सरकार की ओर से की जाने वाली व्यवस्थाओं को देखेगी। उन्होंने कहा कि यह मेला ऑथोरिटी महोत्सव के आयोजन की प्लानिंग और जिलो में भी अपनी व्यवस्थाएं करेगी।

मुख्यमंत्री ने सभी प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि 23 दिसंबर गीता जयंती के दिन सभी नागरिक प्रातः 11 बजे एक मिनट तक एक साथ गीता पाठ करें। इस दौरान 3 श्लोक का पाठ होगा। सभी नागरिक अपने घर या कार्यस्थल पर इस गीता पाठ के साथ जुड़ कर गीता के 3 श्लोक का पाठ करें। इसके लिए जियो गीता ऐप के माध्यम से जुड़ सकते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि कुरुक्षेत्र के पावन ब्रहासरोवर के तट पर 7 दिसम्बर को शिल्प एवं सरस मेले से अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव शुरु होगा। इसमें लोगों को एक बार फिर से राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कलाकारों एवं शिल्पकारों का संगम देखने का अवसर मिलेगा।

महोत्सव में हरियाणा के लोकनृत्य, शिल्प, लघुउद्योग, खान-पान इत्यादि से सम्बन्धित हरियाणा पैवेलियन लगेगा, जिससे महोत्सव में आने वाले पर्यटक एवं तीर्थयात्री हरियाणा की संस्कृति से रूबरू हो सकेंगे। हरियाणा के विकास एवं उन्नति विषयक प्रदर्शनियां भी विभिन्न विभागों द्वारा इस अवसर पर लगाई जा रही हैं, जिससे लोगों को सरकार द्वारा चलाई जा रही जनकल्याणकारी योजनाओं और क्षेत्र विशेष में हुए विकास की जानकारी मिलेगी। उन्होंने कहा कि 22 और 23 दिसंबर को 2 दिन हर जिले में गीता उत्सव के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

उन्होंने कहा कि देश के कौने-कौने से आने वाले आगंतुकों को महोत्सव में अधिक समय व्यतीत करने को मिले, इसलिए इस बार 18 दिन तक इस महोत्सव का आयोजन किया जाएगा, जबकि पिछले साल 16 दिन तक चला था। प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर 17 से 24 दिसम्बर तक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने का कि इस महोत्सव में भारतीय सांस्कृतिक सम्बद्ध परिषद (आईसीसीआर) की भागीदारी भी होगी। पूरे विश्व में भारतीय सांस्कृति सम्बद्ध परिषद के सभी 37 केन्द्रों पर ऑनलाइन प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा तथा विजेताओं को महोत्सव के दौरान कुरुक्षेत्र में आमंत्रित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि 7 दिसम्बर से 24 दिसम्बर, 2023 तक ब्रह्म सरोवर के पावन तट पर भजन संध्या और उसके पश्चात भव्य गीता आरती का आयोजन किया जाएगा। यह आरती देश के अन्य तीर्थों पर संध्याकाल को होने वाली भव्य आरती के ही समान है। निश्चय ही इस आरती के आयोजन से कुरुक्षेत्र के तीर्थयात्रा पर्यटन को नए आयाम मिलेंगे।

उन्होंने कहा कि 22 दिसम्बर को महोत्सव के दौरान पुरुषोत्तमपुरा बाग में सन्त सम्मेलन का आयोजन होगा, जिसमें देश के प्रख्यात सन्त मिलकर गीता एवं अध्यात्म विषय पर चर्चा करेंगे। सन्तों का यह मिलन इस समारोह की गरिमा को एक नया स्वरूप प्रदान करेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि 23 दिसम्बर को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में 48 कोस कुरुक्षेत्र के तीर्थों पर एक सम्मेलन आयोजित किया जाएगा, जिसमें कुरुक्षेत्र भूमि के 164 तीर्थ समितियों के प्रतिनिधि भाग लेंगे। तीर्थ प्रतिनिधि अपने तीर्थ की मिट्टी एवं जल भी लेकर आएंगे जिससे बाद में भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा बनाई जाएगी। गीता जयन्ती के दिन 23 दिसम्बर को कुरुक्षेत्र में 18,000 विद्यार्थियों द्वारा वैश्विक गीता पाठ किया जाएगा। धर्मक्षेत्र-कुरुक्षेत्र के सभी 164 तीर्थों पर गीता जयंती के दिन 23 दिसम्बर को दीपोत्सव का आयोजन किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मेला क्षेत्र में श्रद्धालुओं के लिए 7 से 24 दिसम्बर तक फन फेयर व एयरो स्पर्पोटस का आयोजन किया जाएगा। 17 दिसम्बर से 24 दिसम्बर तक विद्यार्थियों के लिए रंगोली, क्ले मॉडलिंग, सांझी, पॉट डेकोरेशन, फेंसी ड्रेस, झांकी एवं पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। उन्होंने कहा कि इस महोत्सव के अवसर पर इस वर्ष 26 नवम्बर से ऑनलाईन गीता प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता चल रही है जो6 दिसम्बर तक चलेगी। इसमें विद्यार्थियों सहित अनेक श्रद्धालु भाग ले रहे हैं। इस ऑनलाईन प्रतियोगिता में 70 हजार से अधिक नागरिकों ने अपना पंजीकरण करवाया है। इसके अलावा, 3 दिसम्बर को कुरुक्षेत्र में गीता मैराथन का सफल आयोजन किया गया।

महोत्सव के अवसर पर इस बार भी धार्मिक एवं सामाजिक संस्थाओं द्वारा प्रदर्शनियों का आयोजन किया जा रहा है जिनमें 48 कोस कुरुक्षेत्र, सन्त कबीर, सन्त रविदास, महर्षि वाल्मिकि, दिव्य ज्योति, चिम्य मिशन, इस्कॉन आदि की प्रदर्शनियां होंगी। इतना ही नहीं, गीता पुस्तक मेले का आयोजन भी किया जाएगा जिसमें देश के 25 से अधिक संस्थाएं एवं प्रमुख प्रकाशक अपनी सहभागिता देकर इस महोत्सव को ज्ञान का महोत्सव बनाने में सहयोग करेंगे।

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