कोरोना की आड़ में कर्मचारियों से जबरन वसूली कर रही खट्टर सरकार

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कोरोना रिलीफ फंड को लेकर खट्टर सरकार द्वारा हरियाणा के साढ़े तीन लाख कर्मचारियों से जबरन वसूली खट्टर सरकार की जोर जबरदस्ती की मानसिकता का दुर्भाग्यपूर्ण उदाहरण है।भारतीय परंपरा व संस्कृति में दान सदैव ऐच्छिक रहा है। यह पहला मौका है कि एक तरफ तो हरियाणा के कर्मचारी सरकार की कर्मचारी विरोधी नीतियों से परेशान हैं, और दूसरी तरफ सरकारी फरमान के जरिए 20 प्रतिशत तक वसूली की जा रही है।हरियाणा के मुख्यमंत्री, श्री मनोहर लाल खट्टर यह भूल गए कि हरियाणा की परंपरा ही दानी और दरियादिली है। कारगिल युद्ध हो, सूनामी हो, केदारनाथ त्रासदी हो या कोरोना से लड़ाई, हरियाणा के सरकारी कर्मचारी व जनता अपनी श्रृद्धा व सामर्थ्य के अनुसार न केवल दान दे रहे हैं, बल्कि जरूरतमंद लोगों तक राशन-पानी-दवाईयां भी पहुंचा रहे हैं। यही सामाजिक सोच हरियाणा की असली आत्मा है।कोरोना से जंग में हरियाणा के कर्मचारी अपनी जान की बाजी लगाकर आगे खड़े हैं। पर्सनल प्रोटेक्शन ईक्विपमेंट यानि एन95 मास्क, गॉगल, ग्लव्स, बॉडी कवरऑल आदि न उपलब्ध होने के बावजूद भी हमारे डॉक्टर, नर्स व स्वास्थ्यकर्मी कोरोना संक्रमित लोगों का इलाज कर रहे हैं। पुलिस के कर्मचारी व अधिकारी दिन रात चप्पे-चप्पे पर ठीकरी पहरा लगाए बैठे हैं। विद्युतकर्मी बिजली व्यवस्था सुचारू रूप से चलाने की निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं, तो जन स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी पानी की आपूर्ति करने में लगे हैं। शिक्षक घर-घर जाकर मिड-डे मील बच्चों तक पहुंचा रहे हैं, तो गांव व शहर के सफाई कर्मचारियों ने सफाई व्यवस्था चुस्त-दुरुस्त बनाए रखने का बीड़ा उठाया है।इस सबके बावजूद भी 07 अप्रैल, 2020 तक खट्टर सरकार द्वारा कर्मचारियों की तनख्वाह नहीं दी गई है

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