भूस्खलन से चकनाचूर हुए सपने

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पुश्तैनी मकानों में खुशहाल जिंदगी जी रहे सात परिवारों को भविष्य के अंधेरे ने बेचैन कर दिया है। बच्चों को स्कूल भेजने, पूजा पाठ, खेतीबाड़ी व पशुओं के लिए चारा लाने आदि सभी काम रविवार को हुए भूस्खलन ने रोक दिए हैं। बच्चों की किताबें मिट्टी में मिलने से उनके सपने चकनाचूर हो गए हैं। एक पिता पर चार बेटियों के भरण पोषण की जिम्मेदारी है। प्रशासन ने भी एक महीने तक का राशन दिया है।मदद के लिए बढ़ते हाथ अभी तो प्रभावित परिवारों की पीड़ा को कम कर रहे हैं लेकिन सवाल यह है कि आखिर कब तक ये लोग इनकी मदद करते रहेंगे। कब तक प्रभावित परिवारों को सराय में सहारा मिलेगा। कैसे बच्चे पढ़ाई पूरी करेंगे। क्या सरकार इन परिवारों को जमीन देने व मकान बनाने के लिए तुरंत कोई ठोस कदम उठाएगी? एसडीएम शशि पाल शर्मा ने कहा प्रशासन का काम राहत व बचाव कार्य करना होता है। बडे़ फैसले सरकार के स्तर पर लिए जाते हैं।

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