विभागों की चुप्पी से बेलगाम हुआ खनन माफिया

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प्रदेश की औद्योगिक राजधानी बीबीएन में खनन माफिया पूरी तरह से बेलगाम हो गया है। अवैध व अवैज्ञानिक ढंग के खनन पर कार्रवाई करने की करीब डेढ दर्जन विभागों के पास शक्तियां है, लेकिन इन विभागों की मूकदर्शिता व चुप्पी के कारण क्षेत्र में खनन कारोबारियों की पौ बारह है। औद्योगिक क्षेत्र बीबीएन में खनन माफिया का आईएएस व आईपीएस तबके के बड़े अधिकारियों से आमना सामना हुआ है और इसमें मुकदमे भी दर्ज हुए है। ऐसे में लगता है कि खनन माफिया से टक्कर लेने के लिए कोई विभाग आगे नहीं आ रहा है। यहां तक कि खनन विभाग भी मात्र औपचारिकताओं में सिमट कर रह गया है। विभाग को लगातार शिकायतें मिलती रहती है, लेकिन इस पर विभाग अपनी रूटीन कार्रवाई बताते हुए खडडों व नदियों किनारे जाने वाले चोर रास्तों को जेसीबी की मदद से बंद तो कर देता है, लेकिन बेलगाम खनन माफिया पर नकेल कसने में पीछे हटता है। खनन विभाग द्वारा इन चोर रास्तों पर की गई कार्रवाई को बढ़ा चढ़ा कर दर्शाया जा रहा है, लेकिन वास्तविक स्थिति यह है कि बीबीएन में खनन कारोबारियों की पौ बारह है और विभागों के मूक बनने का खनन कारोबारी पूर्ण लाभ उठा रहे है। वैसे तो पुलिस खनन कारोबारियों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है और उनके चालान काट रही है, लेकिन अन्य विभाग पूरी तरह से मूक बने बैठे है। यहां तक कि उपमंडल प्रशासन द्वारा विभिन्न विभागों की कमेटी बनाई गई है और उन्हें चालान बुक भी जारी की हुई है, लेकिन विभाग खनन माफिया से उलझने से कतराते है। क्षेत्र में खनन माफिया की सक्रियता से भू संपदा को जहां कौडिय़ों के भाव बेचकर माफिया के लोग तो मोटी कमाई कर रहे है, वहीं क्षेत्र के करीब एक दर्जन पुल व सिंचाई योजनाएं इसकी भेंट चढ़ चुकी है, जबकिअवैध खनन के मामलों में पुलिस व प्रशासन ने करोड़ों रुपये का राजस्व सरकार के कोष में जमा करवाया है, लेकिन इसमें अब गिरावट आई है। 

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