राधा कृष्ण मंदिर में पंचभीष्म की धूम

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पुजारी सुदेश शर्मा राधा कृष्ण ने वताया  की  भीष्म पितामह का मूल नाम देवदत्त था । लेकिन अपने कुलज और वंश की रक्षा के लिए भीष्म पितामह द्वारा आजीवन अखंड ब्रह्मचर्य जीवन बिताने की भीष्म प्रतिज्ञा लेने के वाद वे भीष्म कहलाए । पांच दिन चलने वाले भीष्म मेलों के बारे में उन्होंने बताया की भीष्म पितामह ने 5 दिन पांडवों को नीति उपदेश दिया था । इस कारण पंच भीष्म मेले 5 दिन मने जाते है पंच भीष्म मेलों की महिमा का वर्णन करते हुए कहा इन मेलों में ज्वालामुखी मंदिर के पास राधा कृष्ण मंदिर में पांच दिनों के लिए तेल के दीपक भी जलाए जाते है इन दिनों में तुलसी माता और विष्णु जी का विवाह भी किया जाता है और यह दीपक पितरों की याद भी जले जाते है इन दिनों में विष्णु भगवन की आँवले के रूप में पूजा की जाती है इन पांच दिनों में महिलाए उपवास भी करती है की इनके घर में सुख शांति व् समृद्धि बानी रहे | इसमें स्त्रियां अपने घर में सुख समृद्धि की कामना करती है इन्हे पांच भीष्म  कहा जाता है क्योकि इन पांच दिनों में अपनी भीष्म प्रतिज्ञा के कारण पांच दिनों तक बाणों के शैया पर सोये रहे थे।

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