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पीएम पोषण स्कीम के बेहतर क्रियान्वयन पर दें ध्यान – मुख्य सचिव

हरियाणा के मुख्य सचिव संजीव कौशल की अध्यक्षता में हुई पीएम पोषण योजना (मध्याह्न भोजन) की राज्य स्तरीय संचालन-सह-निगरानी समिति की बैठक में वर्ष 2024-25 के लिए 658 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दी गई। इसमें राज्य का हिस्सा 457.26 करोड़ रुपये, जबकि केंद्र सरकार का हिस्सा 200.74 करोड़ रुपये होगा।

उल्लेखनीय है कि शिक्षा विभाग द्वारा क्रियान्वित पीएम पोषण योजना राज्य के 8671 प्राथमिक स्कूलों एवं 5582 उच्च प्राथमिक विद्यालयों सहित कुल 14,253 विद्यालयों में संचालित की जा रही है। इनमें 14 हजार प्ले वे स्कूल बाल वाटिकाएं भी शामिल हैं।मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि सभी अधिकारी पीएम पोषण योजना के बेहतर क्रियान्वयन और उपयोग पर ध्यान दें ताकि बच्चों को पोषण व प्रोटीन युक्त भोजन मिल सके। इसके अलावा, देश के अन्य राज्यों का सर्वे करके बच्चों को पूर्ण रूप से प्रोटीन और पोषणयुक्त भोजन प्रदान करने बारे सरकार को अवगत करवाएं। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि स्कूलों में बच्चों को गुणवत्तायुक्त भोजन मिले ताकि उन्हें कुपोषण की समस्या से निजात दिलवाई जा सके।

उन्होंने कहा कि प्राथमिक शिक्षा के लिए पोषण संबंधी खाद्य सामग्री प्रदान करने लिए चलाए जा रहे मिड-डे-मील के राष्ट्रीय कार्यक्रम को  अब पीएम पोषण के नाम से जाना जाता है। यह केंद्र सरकार द्वारा प्रायोजित योजना है। इस योजना के तहत सभी सरकारी, स्थानीय निकायों और सरकारी सहायता प्राप्त निजी संस्थाओं द्वारा संचालित प्राथमिक विद्यालयों में प्राथमिक कक्षाओं और उच्च प्राथमिक कक्षाओं के कक्षा 1 से 8  तक के बच्चों को गर्म पका हुआ भोजन प्रदान किया जाता है।  मुख्य सचिव ने कहा कि पीएम पोषण योजना का मुख्य उद्देश्य नामांकन और उपस्थिति में वृद्धि करके प्राथमिक कक्षाओं के छात्रों की पोषण स्थिति में सुधार करना और प्राथमिक शिक्षा की सार्वभौमिकता को बढ़ावा देना है।

उन्होंने कहा कि अब राज्य स्तर पर ही स्कूलों में मेन्यू तैयार करके दिया गया है। इसमें दही के साथ परांठा, पौष्टिक बाजरा, चना और पौष्टिक खिचड़ी के साथ सब्जी पुलाव जैसे व्यंजन शामिल हैं, जो स्वाद और पोषण संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करते हैं। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा कुक कम हेल्पर्स के लिए 1000 रुपए मानदेय निर्धारित किया गया था, जिसमें केंद्र का 600 रुपए तथा राज्य सरकार का 400 रुपए हिस्सा शामिल था। लेकिन अब राज्य सरकार द्वारा इनका मानदेय संशोधित करके 7000 रुपए किया गया है। इसमें राज्य का योगदान 6400 रुपए और केन्द्र का योगदान 400 रुपए है। यह  वृद्धि मध्याह्न भोजन कार्यक्रम में कार्य करने वाले कर्मियों के प्रति सरकार की प्राथमिकता को दर्शाती है।

 

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