पुलवामा हमला: कभी नहीं भर सकेगा ये जख्म

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एक साल हो चला है, लेकिन देशवासियों के दिल में अभी भी पुलवामा हमले के जख्म भरे नहीं हैं। पिछले साल जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में श्रीनगर-जम्मू राजमार्ग पर एक आत्मघाती हमलवार ने दोपहर सवा तीन बजे विस्फोटकों से लदी हुई कार सीआरपीएफ के काफिले में टकरा दी, जिस वजह से हुए विस्फोट में 44 से ज्यादा जवानों शहीद हो गए और करीब इतने ही घायल हो गए। गौर हो की फतहेपुर का शहीद तिलक राज भी इस हमले में शहीद हो गया था।14 फरवरी, को पुलवामा आतंकी हमले में शहीद हुए तिलक राज उस समय एक दो साल का और एक 22 दिन का बेटा विवान छोड़ गए थे। हमसफर के साथ छोड़ जाने का गम किसे नहीं होता है। दर्द को शब्दों में बयां करना संभव नहीं है। आज शहीद तिलक राज को नम आंखो से श्रद्धांजलि दी गई। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय धर्मशाला के परिसर में शहीद की फोटो पर पुष्प अर्पित किए।   इस दौरान कार्यकर्ता ने दो मिनट का मौन रखा। एबीवीपी के जिला संयोजक अभिषेक ने बताया कि शहीद तिलक राज को याद करना हम सभी के लिए गौरव की बात होगी।

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