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नरमा-कपास उत्पादक किसानों ने पूर्व केंद्रीय मंत्री कुमारी सैलजा के समक्ष बर्बादी का रोना रोया

सिरसा/चंडीगढ़। बागड़ी बैल्ट के नरमा कपास उत्पादक किसानों ने मंगलवार को गांव साहुवाला द्वितीय में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव, पूर्व केंद्रीय मंत्री, कांग्रेस कार्यसमिति की सदस्य और हरियाणा कांग्रेस की पूर्व प्रदेशाध्यक्ष कुमारी सैलजा को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि सरकार की लापरवाही और मनमानी से वे पूरी तरह से बर्बाद हो चुके है। गुलाबी सुंडी के प्रकोप के चलते इस बार नरमा की फसल को भारी नुकसान हुआ ऊपर से मंडी में प्राइवेट खरीद एजेंसी 4000 से 4500 रुपये प्रति क्विंटल के भाव में खरीद कर उन्हें लूटने में लगी हुई हैै। सैलजा ने कहा कि गठबंधन सरकार को किसानों की कोई चिंता नहीं है, ऐसे में अन्नदाता दोहरी मार झेल रहा है, न तो फसल बिक रही है और न ही वह गेहूं की बिजाई कर पा रहा है क्यों उसके पास डीएपी और यूरिया खरीदने के लिए पैसा नहीं हैं।

गांव मम्मड निवासी विक्रम बैनीवाल, सेनपाल कोठा निवासी अमनदीप सिंह नंबरदार और नाईवाला के सरपंच गुरभेज सिंह के नेतृत्व में मम्मडखेडा, केहरवाला, सेनपाल कोठा, नथोर, बचेर, खारियां, चक्का, भूना, कालुआना आदि गांवों के नरमा उत्पादक किसान कुमारी सैलजा से गांव साहुवाला द्वितीय में मिले और उन्हें ज्ञापन सौंपा। किसानों ने उन्हें बताया कि इस बार कॉटन बैल्ट में गुलाबी सुंडी के प्रकोप से नरमा की फसल बुरी तरह से बर्बाद हुई है। जो फसल बची है उसे खरीदने में प्राइवेट एजेंसी मनमानी कर रही है। उन्होंने कहा कि गेंहू की बिजाई करनी है जिसके लिए डीएपी और यूरिया खाद की जरूरत है, नरमा की फसल बेचने जाते है तो मंडी में पहले उसे 5400 से 5500 रुपये का भाव देने की बात कही जाती है और जब वह ट्राली से नरमा उतार लेता है तब प्राइवेट एजेंसी उसमें नमी ज्यादा बताकर 4000 से 4500 रुपये प्रति क्विंटल के भाव देती है। ऐसे में मजबूरी के चलते उसे फसल बेचनी पड़ती है। उन्होंने कहा कि सरकार ने सरकारी खरीद बंद कर उन्हें प्राइवेट एजेंसी के हाथों लुटने के लिए छोड़ दिया है। किसानों ने कहा कि इस सरकार को कोई भी मंत्री, विधायक यहां तक की कोई अधिकारी कुछ भी सुनने को तैयार नहीं है।

इस मौके पर कुमारी सैलजा ने कहा कि प्रदेश में नरमा कपास के उचित भाव न मिलने के कारण किसानों पर दोहरी मार पड़ रही है। एक ओर जहां गुलाबी सुंडी से फसल बर्बाद हुई तो दूसरी ओर हालात ये है कि मंडी में उचित भाव नहीं दिया जा रहा है। हरियाणा को उत्तर भारत में प्रमुख कपास उत्पादक प्रदेश में गिना जाता है। इस प्रदेश के हिसार, सिरसा, फतेहाबाद, महेंद्रगढ़, रेवाड़ी और भिवानी जिले शामिल है। जहां पर हरियाणा का लगभग 70 फीसदी कपास का उत्पादन होता है। इस बार नरमा कपास की 70 प्रतिशत फसल पर गुलाबी सुंडी का हमला हुआ। जिससे किसानों की उम्मीदों पर पानी ही फिर गया। सरकारी खरीद बंद हो चुकी है और प्राइवेट एजेंसी मनमानी कर रही है। किसानों को नरमा के उत्पादन पर आए खर्च के मुताबिक यह भाव कुछ भी नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार की लापरवाही के चलते किसानों को पहले ही खाद, बीज व कीटनाशक नकली मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसानों को बचाने के लिए सरकार को आगे आना चाहिए तथा समर्थन मूल्य पर कपास की खरीद करें। इस मौके पर पूर्व विधायक बलवान सिंह दौलतपुरिया, वरिष्ठ कांगे्रस नेता संदीप नेहरा एडवोकेट, विनीत कंबोज, लालबहादुर खोवाल आदि मौजूद थे।

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