जान जोखिम में डालकर बसों में सफर कर रही छात्राएं

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सत्ता प्राप्ति के बाद से ही हरियाणा की भाजपा सरकार बेटी-पढ़ाओं व बेटी बचाओ के नारा देती रही है। इसके लिए न सिर्फ जागरूकता अभियान चलाए गए है बल्कि प्रचार-प्रसार पर भी हरियाणा सरकार ने पिछले पौने पांच सालों में करोड़ों रूपया भी पानी की तरह बहाया है। लेकिन बेटियां कितनी सुरक्षित है इस बात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिले के बेरी क्षेत्र की सैकड़ों छात्राओं को रोहतक पढऩे जाने के लिए हर रोज हरियाणा रोड़वेज की बसों में बाहर खिड़कियों पर लटक कर अपनी जान-जोखिम में डालकर सफर तय करना पड़ता है। बेटियों के रोड़वेज बसों में बाहर खिड़कियों पर लटक कर कॉलेज जाने का विडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। छात्राओं की माने तो उनके क्षेत्र में कोई भी महिला कॉलेज न होने के चलते उन्हें अपने क्षेत्र से बीस से 25 किलोमीटर दूर हरियाणा रोड़वेज की बस में जाना पड़ता है। उनके अनुसार सबसे दुखद पहलू यह है कि रोड़वेज विभाग ने भी बेरी,दूबलधन व मातनहेल से एक-एक बस सुबह के समय कॉलेज जाने के लिए लगा रखी है। लेकिन छात्राओं की संख्या इन तीन बसों से कई गुणा अधिक है। ऐसे में उन्हें बाहर खिड़कियों पर लटक कर ही रोहतक कॉलेज तक का सफर तय करना पड़ता है। बस न होने से परेशान इन कॉलेज छात्राओं ने सुबह के समय नेशनल हाईवे के डीघल चौक पर शासन व प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की। छात्राओं का कहना था कि करीब चार साल पहले जब सीएम उनके क्षेत्र बेरी आए थे तो उन्होंने बेरी में महिला कॉलेज खोलने की घोषणा की थी। लेकिन चार साल बीतने के बावजूद भी न तो बेरी क्षेत्र में महिला कॉलेज ही बन पाया और न ही सरकार ने उनके सुखद सफर के लिए रोड़वेज विभाग की व्यवस्था की।

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