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सरकार को हो रहा है रोजाना करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान, क्या चाहती है सरकार : कुमारी सैलजा

चंडीगढ़, 10 जनवरी। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की राष्ट्रीय महासचिव, पूर्व केंद्रीय मंत्री, हरियाणा कांग्रेस कमेटी की पूर्व प्रदेशाध्यक्ष और उत्तराखंड की प्रभारी कुमारी सैलजा ने कहा कि प्रदेश में अपने हकों के लिए लोग आवाज उठा रहे है, धरना-प्रदर्शन और हड़ताल कर रहे है इतना सब होता देख और सुनकर भी सरकार गूंगी बहरी बनी हुई है, ऐसी सरकार को सत्ता में बने रहने का कोई हक नहीं हैं। आए दिन मांगों को लेकर किसान, कर्मचारी, डॉक्टरों को हड़ताल होती रहती है और अब प्रदेश के पटवारी और कानूनगो मांगों को लेकर हड़ताल पर है लेकिन सरकार अब भी कानों में मेल डालकर बैठी हुई है। इस हड़ताल से राजस्व विभाग में सारे कामकाज ठप है टेबल पर फाइलों के ढेर लगे हुए हैं। सरकार रोजाना करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है। यह सरकार आखिर चाहती क्या है, ऐसी तानाशाह सरकार को इस बार जनता बाहर का रास्ता दिखाकर रहेगी।

मीडिया को जारी बयान में कुमारी सैलजा ने कहा है कि सरकार का काम आम जनता को मूलभूत सुविधाएं प्रदान करना होता है, उनकी समस्याओं का समाधान करना होता है, उनकी मांगों पर सहानुभूति पूर्वक गंभीरता से विचार करना होता है, जनता के हकों की रक्षा करना भी सरकार का ही दायित्व होता है, अगर सरकार ही जनता के हकों पर डाका डालने लगे तो समझो देश में लोकतंत्र का गला घोंटा जा रहा है। प्रदेश की तानाशाह गठबंधन सरकार दमनकारी नीतियों के सहारे जनता को दबाना चाहती हैं। वह किसी की आवाज सुनने को तैयार नहीं है। प्रदेश के हालात दिन प्रतिदिन और भी बत्तर होते जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि प्रदेश के हर वर्ग हर व्यक्ति अपने हकों के लिए चीख रहा है लेकिन फिर भी सरकार कुछ सुनने को तैयार नहीं है, इतना ही नहीं ज्यादा जोर से चीखने वालों पर लाठियां बरसाई जाती है। इस तानाशाह सरकार से हर व्यक्ति परेशान है। सरकार जनता की सेवा के लिए बनी है अपनों की सेवा के लिए नहीं। किसान और कर्मचारी जब भी अपने हकों के लिए आवाज उठाते है उनका शोषण और उत्पीड़न शुरू हो जाता है।

उन्होंने कहा है कि प्रदेश में पटवारी और कानूनगो जायज मांगों को लेकर हड़ताल पर है, सरकार को कम से कम उनकी बात सुनने के लिए आगे आना चाहिए लेकिन सरकार के पास हड़तालियों से मिलने तक का समय तक नहीं हैं। इस हड़ताल के चलते प्रदेश में करीब 10 हजार रजिस्ट्री और करीब सवा लाख फाइलें पेंडिंग पड़ी है। प्रदेश के 17 जिलों में 10 हजार रजिस्ट्री और 35 हजार इंतकाल के लिए भटकना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार वार्ता के लिए आगे नहीं आई तो यह हड़ताल और लंबी चल सकती है अगर ऐसा हुआ तो राजस्व विभाग में सारे काम पूरी तरह से ठप हो जाएंगे। हड़ताली कहते है कि मुख्यमंत्री ने जनवरी 2023 में  पटवारियों का वेतनमान बढ़ाने की घोषणा की थी बाद में इस बारे में अधिसूचना जारी हुई थी पर कोई फायदा नहीं हुआ। यानि सरकार की अपनी ही घोषणाओं पर काम नहीं हो रहा है या ब्यूरोक्रेसी पर सरकार की पकड़ नहीं हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को अपनी हठधर्मिता छोड़कर लोगों की बातें सुननी चाहिए अगर सरकार ने जनता को अनसुना किया तो यही जनता आने वाले चुनाव में सरकार को सत्ता से बाहर कर देगी, जनता यही सोचकर सरकार को सबक सिखाने के लिए चुनाव का प्रतीक्षा कर रही है।

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