सरकारी विद्यालयों और विश्वविद्यालयों की दुर्दशा अधिक

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शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय सचिव अतुल कोठारी ने पत्रकारों को बताया कि शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास द्वारा इस  तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया है। चरित्र निर्माण व्यक्तित्व के समग्र विकास विषय पर इस कार्यशाला का आयोजन किया गया है। उन्होंने कहाकि यह शिक्षा का महत्वपूर्ण आधारभूत विषय है, आज शिक्षा के नाम पर डिग्रियां तो बांटी जा रही हैं लेकिन अच्छे नागरिक तैयार नहीं हो रहे हैं। आज हमारी सारी समस्या की जड़ ही यहीं है। ऐसे में युवा तथा बच्चे चरित्रवान कैसे बने और उनका समग्र विकास कैसे हो यह चिंतनीय है। आज की सोच है कि नौकरी कैसे मिले, इस तरह तो हर व्यक्ति केवल नौकर बनना चाहता है। जो नौकर नहीं बनता है वह बेकार बनता है। वास्तव में तो आज के युवा जीवन के महत्वपूर्ण जीवन के 15-20 साल जीवन के शिक्षा में लगा देते हैं। इस के बाद तो होना चाहिए कि उनमें इतनी क्षमता होनी चाहिए कि वह 20- 50 लोगों को नौकरी दे सके। आज केवल सीमित मात्रा में रटी रटाई पद्धति से शिक्षा दी जा रही है। ऐसे में बच्चों के व्यक्तित्व का समग्र विकास और चरित्र का निर्माण नहीं हो रहा है। उन्होंने बताया कि उनके द्वारा 2012 से इस विषय पर काम किया जा रहा है। जहां जह इसके प्रयोग किये गए और गंभीरता से प्रयास किये गए, उसके गजब व सरहनीय परिणाम आये। यह विद्यालय से विश्वविद्यालय तक प्रयोग किये गए। उन्होंने कहाकि आज समाज में जो यह समस्या है यह बच्चों की समस्या नहीं है बल्कि यह बड़ों की समस्या है। बच्चों को अच्छी दिशा देने के लिए इस कार्यशाला के माध्यम से प्रयोग कर रहे हैं। उन्होंने किये गए अपने कई प्रयोगों के उदाहरण दिए। सरकारी विद्यालयों और विश्वविद्यालयों की दुर्दशा अधिक है। अगर सरकारी शिक्षण संस्थानों की दशा सुधरे तो देश की आधी शिक्षा की समस्या दूर होगी। हरियाणा सरकार इस में काफी प्रयास हो रहे हैं। 

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