कम हुआ रेटिंग एजेंसियों का भरोसा !

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साल 2019 भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बुरा साबित हुआ है. जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) की विकास दर घटकर छह साल के निचले स्तर पर आ गई है. सेंट्रल स्टेटिस्टिक ऑफिस (CSO) की ओर से जारी जीडीपी के आंकड़े बताते हैं कि वित्त वर्ष 2019 की ​दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर, 2019) में जीडीपी की विकास दर 4.5 फीसदी पर रही, जो कि 2012-13 के बाद सबसे निचला स्तर है. पिछली छह तिमाही से जीडीपी विकास दर लगातार ​नीचे जा रही है. इससे अलग लगभग सभी वित्तीय संस्थानों और रेटिंग एजेंसियों ने भी भारत की जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान घटा दिया है.इंटेलीजेंस यूनिट (DIU) ने साल की शुरुआत में रेटिंग एजेंसियों के अनुमानों की तुलना वर्तमान आंकड़ों से की और पाया कि एक साल से भी कम समय में रेटिंग एजेंसियों ने वित्त वर्ष 2019-20 के लिए जीडीपी विकास दर का अनुमान 1.5 फीसदी तक घटा दिया है. DIU ने कुल आठ रेटिंग एजेंसियों/वित्तीय संस्थानों के आंकड़ों का विश्लेषण किया. इनमें भारतीय रिजर्व बैंक, भारतीय स्टेट बैंक, विश्व बैंक, एशियाई विकास बैंक, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष, क्रेडिट रेटिंग एजेंसी CRISIL, मूडीज और केयर रेटिंग्स शामिल हैं.साल की शुरुआत में लगभग इन सभी वित्तीय संस्थानों ने उम्मीद जताई थी कि भारत की जीडीपी की विकास दर इस साल 2018 से बेहतर रहेगी. हालांकि, ऐसा नहीं हुआ. इस साल जनवरी से अप्रैल के बीच रेटिंग एजेंसियों ने भारत की जीडीपी विकास दर औसतन 7.3 रहने अनुमान जताया था. लेकिन साल के अंत तक यानी अक्टूबर-दिसंबर के बीच इन एजेंसियों ने 2019-20 के लिए जीडीपी विकास दर का अनुमान घटा दिया. इन सभी आठ एजेंसियों ने वित्त वर्ष 2019-20 के लिए जीडीपी विकास का अनुमान औसतन 5.8 रखा है. एक वर्ष के अंदर जीडीपी विकास दर के अनुमान में 1.5 फीसदी की कटौती हो गई.

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