26/11 के इस हीरो ने अकेले बचाई थी कई जिंदगियां,फिर हो गए शहीद

0
190

आज मुंबई में हुए आतंकी हमले को पूरे 11 साल हो गए हैं. 26 नवंबर 2008 को पाकिस्तान से आए 10 आतंकवादियों ने मुंबई में तबाही मचाते हुए 164 लोगों की जान ले ली थी. आज भी इस हमले का असली मास्टरमाइंड पाकिस्तान में आजाद घूम रहा है. इस हमले ने भारत के हर नागरिक को ऐसा जख्म दिया है, जो शायद ही कभी भर पाए.इस हमले में हमने कई बहादुर पुलिस और सेना के जवान भी खोए, जो आतंकियों से लोहा लेते हुए शहीद हो गए. वहीं वहां एक ऐसा जवान भी मौजूद था जिसने कई लोगों की जान बचाई. हम बात रहे हैं मेजर संदीप उन्नीकृष्णन की. जो इस हमले में 28 नवंबर 2008 को शहीद हो गए थे. उस समय वह 31 साल के थे.संदीप ने अपनी जान की परवाह किए बगैर अपने देश के लोगों को बचाने के लिए अपनी जान न्योछावर कर दी. अपनी जान पर खेलकर कई लोगों की जान बचाने वाले मेजर संदीप उन्नीकृष्णन का जन्म 15 मार्च 1977 को हुआ था.संदीप होटल ताज में आतंकियों से भिड़े थे और 14 लोगों को सुरक्षित निकाला था. यही नहीं उन्होंने कारगिल में लड़ते हुए पाकिस्तान के कई फौजियों को ढेर कर दिया था. उन्होंने सेना के सबसे मुश्किल कोर्स ‘घातक कोर्स’ में टॉप किया था. अदम्य बहादुरी के लिए उन्हें सर्वोच्च पुरस्कार अशोक चक्र से नवाजा गयाबता दें, लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादियों से भिड़ने के दौरान इस जवान ने अपने साथियों से कहा था ‘तुम ऊपर मत आना, मैं संभाल लूंगा’. उनके कहे हुए शब्द दूसरे  जवानों पर गहरी छाप छोड़ गए.26 नवंबर 2008 में मुंबई में आतंकी हमला हुआ था. हेमंत करकरे दादर स्थित अपने घर पर थे. वह फौरन अपने दस्ते के साथ मौके पर पहुंच गए थे. उसी समय उनको खबर मिली कि कॉर्पोरेशन बैंक के एटीएम के पास आतंकी एक लाल रंग की कार के पीछे छिपे हुए हैं. वहां तुरंत पहुंचे तो आतंकी फायरिंग करने लगे. इसी दौरान एक गोली एक आतंकी के कंधे पर लगी. वो घायल हो गया. उसके हाथ से एके-47 गिर गया. वह आतंकी अजमल कसाब था, जिसे करकरे ने धर दबोचा.आतंकियों की ओर से जवाबी फायरिंग में तीन गोली इस बहादुर जवान को भी लगी, जिसके बाद वह शहीद हो गए. मुंबई पुलिस के अतिरिक्त आयुक्त अशोक कामटे और वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक विजय सालस्कर भी 26/11 हमले में शहीद हो गए थे.आज मुंबई के 26/11 आतंकी हमले की 11वीं बरसी है. 26 नवंबर 2008 की ही वह काली रात थी, जब लश्कर-ए-तैयबा के 10 आतंकी समुद्री रास्ते से भारत की व्यावसायिक राजधानी में दाखिल हुए और 164 बेगुनाह लोगों की जान ले ली. हमले में 308 लोग जख्मी भी हुए. हमले में जिंदा पकड़े गए एकमात्र कसूरवार अजमल कसाब को 21 नवंबर 2012 को फांसी दे दी गई.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here